Agri Tips: ऊसर और क्षारीय मिट्टी में गन्ने की खेती से जूझ रहे किसानों के लिए ‘यूपी 14234’ किस्म राहत बनकर सामने आई है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद द्वारा विकसित यह किस्म 8–8.5 pH वाली मिट्टी में भी अच्छी पैदावार देती है. इसकी अंकुरण क्षमता बेहतर, पौधे की ऊंचाई अच्छी और पत्तियां चौड़ी होती हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण बेहतर होता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म को अपनाकर किसान ऊसर भूमि में भी गन्ने की खेती से अच्छी आमदनी कमा सकते हैं.
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ संजीव कुमार पाठक ने बताया कि जिन क्षेत्रों में मिट्टी का pH स्तर 8 से 8.5 तक पहुंच जाता है, वहां सामान्य गन्ने की किस्में सर्वाइव नहीं कर पाती हैं. ऐसे में ‘यूपी 14234’ किस्म किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इस किस्म की सबसे बड़ी खूबी इसका ऊसर भूमि के प्रति सहनशील होना है. इसका जमाव (germination) बहुत शानदार है और इसकी ऊंचाई भी अच्छी रहती है. इसकी चौड़ी पत्तियां प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को तेज करती हैं, जिससे पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और पैदावार में गिरावट नहीं आती है.
खेती के लिए क्यों खास है ‘यूपी 14234’?
गन्ने की नई किस्म ‘यूपी 14234’ को विशेष रूप से उन इलाकों के लिए तैयार किया गया है जहां जमीन ऊसर है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस किस्म का जमाव प्रतिशत अन्य किस्मों की तुलना में काफी बेहतर है. इसके पोर बेलनाकार होते हैं और कलिकाएं गोलाकार होती हैं, जो इसे एक मजबूत शारीरिक संरचना प्रदान करती हैं. यह किस्म न केवल विपरीत परिस्थितियों को झेलती है बल्कि कम लागत में अच्छी उपज देने की क्षमता भी रखती है.
इस किस्म की एक मुख्य विशेषता इसकी पत्तियों का फैलाव है. गन्ने की पत्तियां जितनी बेहतर तरीके से फैलती हैं, उतनी ही प्रभावी ढंग से प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया संपन्न होती है. इससे गन्ना अपना भोजन अधिक कुशलता से बना पाता है, जिसका सीधा असर उसकी मोटाई और वजन पर पड़ता है. ऊसर भूमि में जहां अन्य पौधे संघर्ष करते हैं, ‘यूपी 14234’ अपनी इसी विशेषता के कारण मजबूती से खड़ा रहता है और किसानों को निराश नहीं करता है.
किसानों की बढ़ेगी आमदनी
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद द्वारा विकसित यह किस्म अब ऊसर प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए समृद्धि का रास्ता खोल रही है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान इस किस्म को अपनाकर अपनी बंजर पड़ी या कम उपजाऊ भूमि का सही इस्तेमाल कर सकते हैं. बेहतर जमाव, अच्छी ऊंचाई और शानदार वजन के कारण यह मिलों के लिए भी पसंदीदा किस्म बनती जा रही है। इससे न केवल फसल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नया बूस्ट मिलेगा.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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