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Iran war: पश्चिम एशिया में जारी जंग ने पूरी दुनिया को टेंशन में डाल दिया है. अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमले से हर कोई सकते में है. ईरान की ओर से किए गए पलटवार ने हालात को और भी गंभीर बना दिया है. होर्मुज स्ट्रेट के जरिये होने वाली शिपिंग का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध पर गंभीर चिंता जताई है. (फाइल फोटो/PTI)
राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्री क्षेत्र अब केवल व्यापारिक मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि विभिन्न देशों के बीच शक्ति संतुलन और रणनीतिक वर्चस्व का अहम मंच बन चुका है. उनके अनुसार, वैश्विक राजनीति और सुरक्षा ढांचे में हो रहे बदलावों के कारण समुद्री क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है. रक्षा मंत्री ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है. ऐसे में यदि इस क्षेत्र में किसी प्रकार का व्यवधान या संघर्ष बढ़ता है, तो इसका प्रभाव सीधे तौर पर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इस बात का उदाहरण है कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है. राजनाथ सिंह ने कहा कि पुराने वैश्विक ढांचे, मान्यताएं और स्थिरताएं टूट रही हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली एक नए दौर में प्रवेश कर रही है.
स्थिति बेहद असामान्य…
रक्षा मंत्री के अनुसार, वेस्ट एशिया की मौजूदा स्थिति बेहद असामान्य है और इसके भविष्य के बारे में स्पष्ट अनुमान लगाना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि यह कहना कठिन है कि आने वाले समय में वहां की स्थिति कैसे बदलेगी या उसका असर भारत और उसके पड़ोसी क्षेत्रों पर किस प्रकार पड़ेगा. इस दौरान उन्होंने भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा उद्योग में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कई संरचनात्मक और नीतिगत सुधार लागू किए हैं, जिससे रक्षा उत्पादन को गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों स्तरों पर मजबूत किया जा सके.
डिफेंस सेक्टर की बात
राजनाथ सिंह ने कहा कि इन सुधारों के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में दक्षता, जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है. साथ ही पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अनुसंधान और विकास (R&D) को भी प्राथमिकता दी जा रही है, खासकर जहाज निर्माण क्षेत्र में. इस संदर्भ में उन्होंने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) सहित देश के प्रमुख रक्षा शिपयार्ड्स का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें मजबूत बनाकर भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के लिए अधिक सक्षम बनाया जा रहा है. अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आज विभिन्न देश जमीन, हवा और समुद्र के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि यह असामान्य स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही है, जो आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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