एक्ट्रेस वर्षा उसगांवकर को बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में ‘उत्तरा’ का खास रोल बिना किसी स्क्रीन टेस्ट के महज एक संयोग से मिला था. जब वह अपने परिवार के साथ शूटिंग देखने सेट पर गई थीं, तब गुफी पेंटल ने उन्हें देखते ही इस रोल का प्रस्ताव दिया था. शो की सफलता ने उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए, जिसके बाद उन्होंने जैकी श्रॉफ के साथ ‘दूध का कर्ज’ से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया. वर्षा ने ‘तिरंगा’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया और मराठी सिनेमा में भी अपनी धाक जमाई. आज वे कहां और किस हाल में हैं? आइए, जानते हैं.
एक्ट्रेस ने हिंदी-मराठी सिनेमा में भी काम किया है. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: मराठी और हिंदी सिनेमा का जाना-माना चेहरा वर्षा उसगांवकर के ‘महाभारत’ में ‘उत्तरा’ बनने की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. 28 फरवरी 1968 को गोवा में जन्मीं वर्षा उसगांवकर के पिता चाहते थे कि उनकी बेटी इस ऐतिहासिक सीरियल का हिस्सा बने, लेकिन वर्षा ने इसके लिए कभी कोई फॉर्मल ऑडिशन या कोशिश नहीं की थी. दिलचस्प बात यह है कि जब ‘महाभारत’ को शुरू हुए एक साल बीत चुका था, तब वर्षा महज एक दर्शक के तौर पर अपने परिवार के साथ शूटिंग देखने सेट पर गई थीं. वहां छोटे अभिमन्यु का ट्रैक चल रहा था और मेकर्स को उत्तरा के रोल के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी. सेट पर मौनजूद गुफी पेंटल (शकुनि मामा) की नजर वर्षा पर पड़ी और उन्होंने बिना देर किए उनसे पूछ लिया कि क्या वह यह रोल करना चाहेंगी? वर्षा के माता-पिता भी वहीं थे और उन्होंने तुरंत हां कर दी, जिसके बाद बिना किसी स्क्रीन टेस्ट के उन्हें यह बड़ा ब्रेक मिल गया.
‘महाभारत’ में वर्षा की एंट्री एक शानदार कत्थक डांस के साथ हुई थी, जिसे गोपी कृष्ण जी ने कोरियोग्राफ किया था. उस एक सीन ने उन्हें रातों-रात पूरे देश में पहचान दिला दी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे उनके लिए खुल गए. हालांकि, वर्षा ने अपने करियर की शुरुआत मराठी थिएटर से की थी और सचिन पिलगांवकर ने उन्हें ‘गंमत जम्मत’ से लॉन्च किया था, लेकिन ‘महाभारत’ की सफलता ने उन्हें बॉलीवुड का चमकता सितारा बना दिया. इसके बाद उन्होंने 1990 में जैकी श्रॉफ के साथ फिल्म ‘दूध का कर्ज’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा. वर्षा बताती हैं कि उनके लिए हिंदी फिल्मों में आना एक सपने जैसा था जो इस शो के जरिए सच हुआ. उन्होंने ‘तिरंगा’, ‘हनीमून’ और ‘घर आया मेरा परदेसी’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया और अपनी एक अलग पहचान बनाई.
हिंदी-मराठी सिनेमा में समझाया फर्क
मराठी और हिंदी सिनेमा के अपने अनुभव बयां करते हुए वर्षा कहती हैं कि दोनों इंडस्ट्री में काम करने का तरीका काफी अलग है. जहां मराठी फिल्मों में कहानी और मजबूत किरदारों पर ज्यादा जोर दिया जाता है, वहीं हिंदी फिल्मों में ग्लैमर, लुक्स और स्टाइल को काफी अहमियत मिलती है. हिंदी सिनेमा में एक एक्ट्रेस का नेशनल ऑडियंस के हिसाब से सुंदर और स्टाइलिश दिखना जरूरी होता है, जबकि मराठी सिनेमा में सादगी और सांस्कृतिक पहनावे को ज्यादा पसंद किया जाता है. एक्टिंग के अलावा वर्षा एक बेहतरीन गायिका भी हैं और आज भी मराठी, हिंदी और कोंकणी कला जगत में एक्टिव हैं. एक संयोग से शुरू हुआ उनका यह सफर आज भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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