कहां पर है प्रह्लाद कुंड?
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, हरदोई में स्थित प्रह्लाद कुंड पावन स्थली है, जहां यह चमत्कार हुआ था. यहां का कुंड आज भी भक्ति और ईश्वरीय शक्ति की याद दिलाता है. प्रह्लाद कुंड हरदोई शहर से कुछ दूरी पर स्थित है और आसानी से पहुंचा जा सकता है.
होती है भगवान नरसिंह की पूजा
प्रह्लाद कुंड के पास छोटा-सा मंदिर है, जहां प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की पूजा होती है. होलिका दहन के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. वे होलिका दहन करते हैं और प्रह्लाद की भक्ति से प्रेरणा लेते हैं.
अलौकिक शक्ति होती है महसूस
यह कुंड न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह लोगों को सिखाता भी है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से कोई भी बाधा पार की जा सकती है. मान्यता है कि श्रद्धालु अगर प्रह्लाद कुंड के दर्शन करें तो वे उस अलौकिक शक्ति को महसूस कर सकते हैं और उनकी सभी समस्याओं का नाश होता है.
होलिका दहन की कहानी
पुराणों के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप को भगवान विष्णु से घृणा थी. वह स्वयं को भगवान मानता था और किसी को भी विष्णु की भक्ति नहीं करने देता था. उसके पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे.
प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप क्रोधित हो गया. उसने प्रह्लाद को कई बार मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे. आखिरी प्रयास में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका का सहारा लिया.
होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी. हिरण्यकश्यप ने होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर आग लगाने को कहा, ताकि प्रह्लाद जल जाए.
लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका की गोद में बैठे प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका स्वयं भस्म हो गई. इस घटना के बाद लोग खुशी से रंग लगाकर और फूल बरसाकर इस विजय का जश्न मनाने लगे. यही परंपरा आज होली के रूप में मनाई जाती है.
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