उर्रा गांव के अंशुल के परिवार से खास बातचीत
इससे पहले कुछ बताएं, सबसे पहले उर्रा गांव को जानना बेहद जरूरी है. दरअसल यह गांव बहराइच और लखीमपुर के बॉर्डर पर बसा हुआ है, जहां पर सुख-सुविधा के नाम पर ना तो कोई हॉस्पिटल है और ना ही कोई अच्छा विद्यालय. ऐसे में इस बीहड़ इलाके से यूपीएससी में सफलता हासिल करना किसी चैलेंज से कम नहीं है.
अंशुल के पिता ने लोकल 18 की टीम से खास बातचीत में बताया कि अंशुल की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 12 तक इसी क्षेत्र से हुई है और फिर इसके बाद अंशुल ने IIT कर 24/7 में कानपुर में 35 लाख के पैकेज पर 4 से पांच महीने जॉब कर छोड़ फिर से यूपीएससी की तैयारी की, जिसका नतीजा यह हुआ कि आज अंशुल का पूरे देश में नाम हो रहा है. घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं है. अंशुल के घर परिवार में अंशुल की मां, एक भाई और एक बहन है. अंशुल के पापा खुद का बिजनेस संभालते हैं और मां हाउसवाइफ हैं.
वृंदावन में रहकर अंशुल को मिली सफलता
अंशुल अग्रवाल के पिता श्रवण अग्रवाल ने बताया कि कोटा से आईआईटी करने के बाद अंशुल को जब 35 लाख रुपए पैकेज की आईआईटी कानपुर में जॉब मिली, तब 5 महीने करने के बाद जॉब छोड़कर वृंदावन आकर यूपीएससी की तैयारी में लग लगा और फिर यहां पर उन्हें कोटा के एक मित्र मिले, जिनके साथ रहते-रहते ही इन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और एग्जाम दिया. अब पहले प्रयास में ही उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है.
अंशुल के पिता ने कहा कि निश्चित तौर पर मेहनत और बांके बिहारी का आशीर्वाद उनकी सफलता के पीछे है. अंशुल सोशल मीडिया से बहुत दूर रहते हैं और व्हाट्सएप भी बहुत कम इस्तेमाल करते हैं. साथ ही वह सादगी भरा जीवन व्यतीत करते हैं. अंशुल बांके बिहारी के बड़े भक्त हैं. हर रोज मॉर्निंग में 3:30 से 4:00 उठकर 1 घंटे की पूजा अर्चना भी करते हैं.
अंशुल के साथ दो और होनहारों ने मारी बाजी
क्षेत्र के तीन होनहार छात्र-छात्राओं ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे जनपद का नाम रोशन किया है. परिणाम आने के बाद उनके घरों पर बधाई देने वालों की कतार लग रही है. नगर पंचायत मिहींपुरवा निवासी रोली मदेशिया ने यूपीएससी परीक्षा में 457वीं रैंक हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है.
रोली के पिता संतोष मदेशिया कस्बे में कपड़े की दुकान चलाते हैं. बेटी की इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है और क्षेत्र के लोग उन्हें बधाई देते नहीं थक रहे हैं. वही भारत–नेपाल सीमा से सटे गांव गौरा पिपरा निवासी महेश जायसवाल ने यूपीएससी परीक्षा में 590वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है. महेश के पिता राजकुमार जायसवाल किसान हैं.
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