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राजधानी में अब पार्किंग विवाद को लेकर हत्या, फायरिंग और चाकूबाजी जैसी घटनाओं के मामले बड़ी संख्या में अदालतों तक पहुंचने लगे हैं। पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ताओं का कहना है कि अदालतों में पहुंचने वाले पार्किंग विवाद से जुड़े मामले तेजी से बढ़े हैं। इसे अब पार्किंग विवाद और मुकदमेबाजी का नया फ्लैशपॉइंट कहा जाने लगा है। दिल्ली में चल रहा पुलिस-वकील विवाद भी पार्किंग को लेकर हुए एक झगड़े का ही नतीजा है। इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय तक को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर बढ़ता गुस्सा शासन और शहरी नियोजन की गहरी विफलता को उजागर करता है। दिल्ली में करीब 3.3 करोड़ की आबादी और 80 लाख से अधिक कारों वाली राष्ट्रीय राजधानी पहले ही वाहनों के दबाव से जूझ रही है। ऐसे में पार्किंग स्थल दुर्लभ होते जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र कसाना ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग को लेकर कई हिंसक विवाद हो चुके हैं। कई जगह सड़क का एक छोटा-सा हिस्सा भी विवाद की वजह बन जाता है। सड़कों पर कारों की कतारें लगी रहती हैं और पैदल चलने वालों के लिए बहुत कम जगह बचती है। ऐसे में पार्किंग को लेकर किया गया एक सामान्य अनुरोध भी टकराव का रूप ले लेता है।

2021 में पार्किंग विवाद की 2,413 कॉल प्राप्त मिलीं, 2025 में 7,000 पहुंचीं : पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2021 में दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम को पार्किंग विवाद से संबंधित 2,413 कॉल प्राप्त हुई थीं, जबकि 2025 में यह संख्या 7,000 के पार पहुंच गई। पार्किंग स्थलों पर होने वाले झगड़े अब रोड रेज की तरह गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि इन विवादों के पीछे केवल लोगों का व्यक्तिगत स्वभाव जिम्मेदार नहीं है, बल्कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में वाहनों के लिए स्पष्ट नियमों, प्रभावी प्रवर्तन और नियोजित पार्किंग स्थलों का अभाव भी इसकी बड़ी वजह है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पार्किंग विवादों ने बेहद गंभीर रूप ले लिया है। जहां पहले आरडब्ल्यूए छोटे-मोटे पार्किंग विवादों को संभाल लेती थीं। वहीं अब ऐसे मामले पुलिस कंट्रोल रूम, जिला अदालतों और कई बार मोर्चरी तक पहुंच रहे हैं। अब प्रत्येक घर में कई-कई कारें हैं। सार्वजनिक पार्किंग की उपलब्धता भी पर्याप्त नहीं है।

आरडब्ल्यूए भी पार्किंग विवादों से जूझ रही

कालकाजी डीडीए फ्लैट्स आरडब्ल्यूए के जितेंद्र राठौर ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में पार्किंग से संबंधित शिकायतों में भारी वृद्धि हुई है। आरडब्ल्यूए के वॉट्सएप ग्रुप पर लगातार शिकायतें आती रहती हैं। कई बार विवाद इतने गंभीर हो जाते हैं कि पुलिस को बुलाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब छोटे झगड़े भी छोटे नहीं रह गए हैं।

अदालतों में बढ़ने लगे पार्किंग विवाद के मामले

वरिष्ठ अधिवक्ता और दिल्ली नगर निगम के पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र कसाना ने कहा कि पॉश सोसाइटियों में जहां कई कारों के लिए पार्किंग स्थल को लेकर झगड़े होते हैं, वहीं दिल्ली के कम संपन्न इलाकों में भी इसी तरह के विवाद देखने को मिल रहे हैं।

कोर्ट भी जता चुका है चिंता

सितंबर 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने सुरमिला बनाम पुलिस आयुक्त एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान शहरी नियोजन की विफलता की ओर ध्यान दिलाया था। यह मामला बदरपुर के एक निवासी की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसके घर के बाहर पड़ोसियों द्वारा वाहन खड़े किए जाने को लेकर विवाद उठाया गया था।

पुलिस बनाम पुलिस नेतृत्व के टकराव में बदल गया विवाद

23 अक्टूबर को शाहदरा इलाके में एक सैलून के बाहर बाइक पार्क करने पर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि इस दौरान अधिवक्ता ललित बंसल से मारपीट की गई। इसके बाद वकील शिकायत लेकर शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे। वकीलों का आरोप था कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई करने के बजाय उनके साथ दुर्व्यवहार कियाए। इस दौरान एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर भी वकीलों ने रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप लगाया। वकीलों ने इसे अपनी बिरादरी के सम्मान पर हमला माना और विवाद बढ़ गया।

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