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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सेक्टर-पाई 1 स्थित ऐच्छर गांव शाखा में ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े में ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी की प्रमुख भूमिका सामने आई है।

बैंक की आंतरिक जांच के अनुसार उसने परिचित आशुतोष पाठक के साथ मिलकर तीन साल तक बचत खातों और एफडी से रकम निकालने का कथित खेल किया। इसके लिए छह अधिकारियों और कर्मचारियों की कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) यूजर आईडी का इस्तेमाल किया गया। रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के बाद आशुतोष तक पहुंचाया गया।

बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है। दीपांशी 26 जुलाई 2021 से शाखा में तैनात थी। बैंक की तहरीर में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, सीनियर कस्टमर सर्विस एसोसिएट, कस्टमर सर्विस एसोसिएट, आरएम स्केल-1 और ऑफिसर स्तर के कर्मचारियों समेत 6 लोगों की यूजर आईडी के इस्तेमाल का जिक्र है। 

आरोप है कि दीपांशी ने इनके लॉगिन और पासवर्ड का दुरुपयोग कर अनधिकृत लेनदेन किए। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों की इसमें भूमिका थी या उनकी जानकारी के बिना आईडी इस्तेमाल हुईं, यह जांच का विषय है।

10 अक्तूबर को आशुतोष से परिचित होने की बात बताई

बैंक की आंतरिक जांच के दौरान 10 अक्तूबर 2026 को दीपांशी ने अधिकारियों को दिए बयान में आशुतोष कुमार पाठक को अपना परिचित बताया था। उसके मुताबिक आशुतोष का उसके पिता के साथ पहले 15 से 20 लाख रुपये के वित्तीय लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। बाद में आशुतोष ने भरोसा दिलाया कि कुछ और रकम लगाने पर पहले का पैसा वापस मिल जाएगा। इस भरोसे में दीपांशी ने कर्ज लेकर चार से पांच लाख रुपये और लगा दिए। उसने यह भी बताया था कि अन्य कर्मचारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना किया गया।

दीपांशी ने खुलवाया था आशुतोष का बैंक खाता

दीपांशी के बयान के बाद शाखा प्रमुख ने आशुतोष के खाते की जांच कराई। इसमें पता चला कि उसका खाता दीपांशी ने ही खुलवाया था। बैंक की पड़ताल के मुताबिक, ग्राहकों की रकम पहले प्रदीप कुमार, मेंबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के खातों में भेजी गई। वहां से कुछ धनराशि आशुतोष के खाते में स्थानांतरित की गई, जबकि कुछ नकद निकाल ली गई। बैंक को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल रकम को छिपाने और आगे पहुंचाने के लिए किया गया।

बैंक की प्रारंभिक जांच में मिली गड़बड़ी

  • संदिग्ध लेन-देन से जुड़े वाउचर बैंक के रिकॉर्ड में नहीं मिले
  • छह अधिकारियों और कर्मचारियों की सीबीएस यूजर आईडी का कथित अनधिकृत इस्तेमाल हुआ
  • ग्राहकों के बचत खातों से रकम निकालकर दूसरे खातों में भेजी गई
  • कुछ खातों में मोबाइल ट्रांजेक्शन अलर्ट बंद या संशोधित कर दिए गए, ताकि निकासी का संदेश ग्राहकों तक न पहुंचे
  • कई एफडी में आशुतोष और अन्य नामजद लोगों को संयुक्त खाताधारक बनाया गया। इसके बाद भुगतान खाते का विवरण बदलकर एफडी समय से पहले तुड़वाई गई और रकम दूसरे खातों में भेज दी गई

ऑफिस असिस्टेंट को नहीं था वित्तीय लेन-देन का अधिकार

दीपांशी ऑफिस असिस्टेंट यानी सब स्टाफ के पद पर कार्यरत थी। बैंक की डेलीगेशन मैट्रिक्स के मुताबिक, उसे इस तरह के वित्तीय लेन-देन स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद उस पर पद और सिस्टम तक अपनी पहुंच का दुरुपयोग करने का आरोप है। बैंक ने सेवा आचरण संहिता के उल्लंघन और वाउचर नष्ट करने की आशंका भी जताई है। सिस्टम लॉग और यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड में लंबे समय तक संदिग्ध गतिविधियां दर्ज मिली हैं।

आठ लोगों के नाम, दीपांशी घर से गायब

बैंक की तहरीर में दीपांशी और आशुतोष समेत आठ लोगों के नाम दर्ज हैं। इनमें साकीपुर निवासी दीपांशी, ऐच्छर निवासी आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेंबंती देवी, प्रियंका कुमारी और शांति देवी शामिल हैं। शालिनी का पता श्यामनगर मंडी, ग्रेटर नोएडा और सरोज देवी का पता गांव ऐच्छर दर्ज है। जांच में दीपांशी के भाई का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि वह अल्फा-1 स्थित दूसरे बैंक में कार्यरत है और उसके खाते में भी रकम स्थानांतरित की गई।

मामला उजागर होने के बाद से दीपांशी साकीपुर स्थित अपने घर पर नहीं मिली है। परिजन भी उसके बारे में जानकारी देने से बच रहे हैं। सीबीआई अब बैंकिंग रिकॉर्ड, यूजर आईडी के इस्तेमाल और खातों के बीच हुए लेन-देन की पड़ताल करेगी। साथ ही नामजद लोगों की भूमिका की भी जांच होगी। बैंक की तहरीर में नाम शामिल होना किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं करता। सभी की जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

बैंककर्मी बहन और भाई के मोबाइल बंद

पीएनबी की शाखा में ग्राहकों की जमा पूंजी में हेराफेरी के मामले में कार्यालय सहायक दीपांशी के साथ उसके भाई की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पीड़ितों का आरोप है कि दोनों बैंक के अंदर मिलने के बजाय बाहर ही उनसे संपर्क करते थे। 

कभी खाता बंद होने तो कभी सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर ग्राहकों को लौटा दिया जाता था। कुछ को बैंक आने पर दीपांशी की नौकरी जाने का डर दिखाया गया। इस दौरान खातों से लाखों की कथित हेराफेरी होती रही। 

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