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भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी पर एलन मस्क ने सवाल उठाए तो राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर उनका स्वागत किया. इसके बाद दोनों की बातचीत चर्चा में आ गई. मस्क का दावा है कि स्टारलिंक 165 से ज्यादा देशों में सेवा देने की मंजूरी पा चुका है. भारत सरकार ने भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए नियम समान हैं. इस विवाद में स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा जांच जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. चीन में टेस्ला की गाड़ियों पर लगी पाबंदियों की रिपोर्ट भी बहस का हिस्सा बनी है.
भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी पर एलन मस्क ने सवाल उठाए.
भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की एंट्री को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. मस्क का सवाल है कि जब उनकी कंपनी को दुनिया के 165 से ज्यादा देशों में सेवा देने की मंजूरी मिल चुकी है तो भारत में अब तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि स्टारलिंक पिछले पांच साल से भारत सरकार के कानूनों और जरूरी शर्तों का पालन कर रही है. इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मस्क के पोस्ट पर जवाब देते हुए उनका स्वागत किया. राहुल ने लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन. दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए.’ मस्क ने जवाब दिया, ‘धन्यवाद, राहुल. यह वाकई परेशान करने वाला है.’ अब इस बातचीत को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्टारलिंक के मुद्दे पर राहुल गांधी और मस्क के सुर मिल रहे हैं? और क्या भारत में कंपनी को मंजूरी देने की प्रक्रिया अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है?
2021 से 2026 तक कैसे बढ़ा स्टारलिंक विवाद?
- 2021: भारत में एंट्री अटकी: स्टारलिंक ने भारत में प्री-बुकिंग शुरू की थी. लेकिन जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं मिलने के कारण कंपनी को बुकिंग रोकनी पड़ी.
- 2024: स्पेक्ट्रम पर टकराव: सैटेलाइट इंटरनेट के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन का मुद्दा चर्चा में आया. मस्क ने स्पेक्ट्रम की नीलामी का विरोध किया.
- 2025: लाइसेंस के बाद भी इंतजार: स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिला लेकिन सेवा शुरू नहीं हो सकी. कंपनी को दूसरी जरूरी मंजूरियों और शर्तों की प्रक्रिया पूरी करनी थी.
- अक्टूबर 2026: सोशल मीडिया पर सवाल: मस्क ने लॉन्चिंग में देरी पर सवाल उठाए. सरकार ने कहा कि नियमों में किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है.
राहुल गांधी और मस्क के बीच क्या हुई बात?
- मस्क के पोस्ट के बाद राहुल गांधी ने उनका स्वागत करते हुए जवाब दिया. राहुल के संदेश में दूसरे व्यक्ति का जिक्र किस संदर्भ में था यह स्पष्ट नहीं किया गया. मस्क ने इसके जवाब में कहा कि स्थिति परेशान करने वाली है. इस बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर दोनों के बीच हुई चर्चा को लेकर बहस शुरू हो गई.
- इससे पहले भी मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में कारोबारी हित स्टारलिंक की एंट्री में बाधा बन रहे हैं. हालांकि सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद और गलत धारणा पर आधारित बताया है. अभिनेता कमल हासन ने भी X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता. उन्होंने भारत को लोकतांत्रिक देश बताते हुए कहा कि देश का भविष्य भारतीय जनता ही तय करेगी. मस्क की पोस्ट पर कई अन्य लोगों ने भी अपनी राय रखी.
सरकार का जवाब: सभी कंपनियों के लिए एक जैसे नियम
भारत सरकार का कहना है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए तय नियम सभी कंपनियों पर लागू होते हैं. सरकार ने इस दावे को खारिज किया कि नियामकीय प्रक्रिया किसी कंपनी को रोकने या किसी दूसरी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अपनाई जा रही है. स्टारलिंक के मामले में लाइसेंस के अलावा सुरक्षा जांच और तकनीकी शर्तें भी अहम हैं. भारत में सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षा नियंत्रणों की स्वतंत्र जांच और भारतीय गेटवे की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है. घरेलू नेटवर्क में डेटा ट्रैफिक की रूटिंग और जरूरत पड़ने पर संदिग्ध टर्मिनल को तुरंत बंद करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसके साथ ही ISRO और भारतीय कंपनियों के सैटेलाइट नेटवर्क को बढ़ावा देने पर जोर है ताकि कनेक्टिविटी बढ़े लेकिन रणनीतिक निर्भरता न बढ़े.
चीन में टेस्ला पर भी लगी हैं पाबंदियां
- मस्क भारत में स्टारलिंक की मंजूरी पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन चीन में उनकी कंपनी टेस्ला की कारों पर भी सुरक्षा के कारण कई जगह प्रतिबंधों की रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं. रिपोर्टों के मुताबिक जून 2022 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चेंगदू दौरे के दौरान कुछ सड़कों पर टेस्ला की आवाजाही रोकी गई थी. जुलाई 2023 में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के उद्घाटन समारोह के दौरान भी कुछ इलाकों में टेस्ला की एंट्री पर रोक की खबरें आईं. 2022 में बेइदैहे इलाके में भी टेस्ला की गाड़ियों पर करीब दो महीने तक प्रतिबंध लगाए जाने की रिपोर्ट थी.
- चीनी सेना ने भी सुरक्षा कारणों से अपने परिसरों में टेस्ला की गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी. आशंका जताई गई थी कि कारों में लगे कैमरे संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें रिकॉर्ड कर सकते हैं और डेटा देश से बाहर जा सकता है. हालांकि इन प्रतिबंधों की परिस्थितियां स्टारलिंक के भारतीय लाइसेंस मामले से अलग हैं. फिर भी यह उदाहरण दिखाता है कि देश अपनी सुरक्षा चिंताओं के आधार पर तकनीकी कंपनियों पर नियम लागू कर सकते हैं.
रिलायंस के योगदान का भी हो रहा जिक्र
इस बहस में रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबारी योगदान का भी हवाला दिया जा रहा है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने पिछले छह सालों में सरकारी खजाने में 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का योगदान किया. वित्त वर्ष 2024-25 में उसका भुगतान करीब 2.10 लाख करोड़ रुपए रहा. इसी अवधि में कारोबार में दोबारा निवेश 1.40 लाख करोड़ रुपए और सामाजिक योगदान 2,156 करोड़ रुपए बताया गया. कंपनी की वर्कफोर्स चार लाख से ज्यादा बताई गई है. 2024-25 में उसका निर्यात 2.78 लाख करोड़ रुपए रहा.
अमेरिका में रिलायंस की 6.7 अरब डॉलर की प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना का भी जिक्र किया जा रहा है. हालांकि किसी कंपनी का आर्थिक योगदान अपने आप में किसी दूसरी कंपनी की लाइसेंस प्रक्रिया का जवाब नहीं है. स्टारलिंक को मंजूरी देने का फैसला सुरक्षा, लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से जुड़े नियमों के आधार पर होना है. आखिरकार असली सवाल यही है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की सेवा कब शुरू होगी और क्या कंपनी सरकार की सभी शर्तें पूरी कर पाएगी?
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सुमित कुमार हिंदी पत्रकारिता का एक उभरता और सक्रिय नाम हैं. वर्तमान में वे News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और सेंट्रल डेस्क टीम का हिस्सा हैं. पिछले चार साल से वे Network18और पढ़ें
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