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होमताजा खबरकृषिदूध निकालने के 1 घंटे बाद तक बकरी का खड़े रहना जरूरी, पकड़ लेगा थनैला रोग

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Goat Farming Tips : बारिश का मौसम बकरी पालकों के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है. बारिश की वजह से बाड़े में नमी, कीचड़ और गंदगी बढ़ने से बकरियों में कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. लोकल 18 से लखीमपुर खीरी के पशु चिकित्सक डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि बारिश में बकरियों के लिए थनैला रोग सबसे खतरनाक है. बकरियां जब गीली और गंदी जमीन पर बैठती या लेटती हैं तो उनके थन के संपर्क में गंदगी और सूक्ष्मजीव आ जाते हैं. डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि बरसात के मौसम में दूध निकालने के बाद करीब 1 घंटे तक बकरी को बैठने न दें.

लखीमपुर खीरी. किसानों के लिए बकरी पालन कम लागत में शुरू होने वाला अतिरिक्त आमदनी का अच्छा जरिया है. बकरी को अक्सर ‘गरीबों की गाय’ भी कहा जाता है. किसान भाई इसे साइट बिजनेस की तरह करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं. इसके लिए पालकों को कुछ बातें जाननी जरूरी हैं. बरसात का मौसम शुरू होते ही बकरी पालकों की चिंता बढ़ जाती है. बारिश के कारण बाड़े में नमी, कीचड़ और गंदगी बढ़ने से बकरियों में कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इनमें थनैला रोग (मास्टाइटिस) सबसे घातक है. थनैला रोग मुख्य रूप से दूध देने वाली बकरियों में देखने को मिलता है. इस बीमारी की वजह से बकरी के थन में सूजन, गर्माहट और दर्द होने लगता है. कई मामलों में दूध का उत्पादन अचानक कम हो जाता है और दूध की गुणवत्ता में भी बदलाव दिखाई देने लगता है. अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है.

बारिश में ही क्यों 

लोकल 18 से लखीमपुर खीरी के पशु चिकित्सक डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि बरसात के मौसम में पशुओं के रहने की जगह को सूखा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. लगातार बारिश होने पर बकरी के बाड़े के आसपास पानी और कीचड़ जमा हो जाता है. जमीन में नमी बनी रहने से बैक्टीरिया के पनपने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में बकरियां जब गीली और गंदी जमीन पर बैठती या लेटती हैं तो उनके थन के संपर्क में गंदगी और सूक्ष्मजीव आ जाते हैं. दूध निकालने के दौरान यदि पशुपालक के हाथ साफ नहीं हैं या दूध निकालने वाले बर्तन की ठीक से सफाई नहीं की गई है तो भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. थन पर चोट, खरोंच या किसी प्रकार की क्षति होने पर भी संक्रमण का रास्ता बन सकता है.

न करें ये गलती

डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि बरसात के मौसम में पशुपालकों को विशेष सावधानी रखना चाहिए. दूध निकालने के बाद करीब 1 घंटे तक बकरी को बैठने न दें. बरसात के मौसम में बकरी पालकों को केवल पशु के खानपान पर ही नहीं, बल्कि बाड़े की स्वच्छता, थन की सफाई और दूध निकालने की प्रक्रिया पर भी ध्यान देना चाहिए. बकरी के दौरान थन में असामान्य बदलाव दिखाई दे तो पशुपालक को सतर्क हो जाना चाहिए.

About the Author

Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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