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Gaurav Bhatia vs Saurav Das: स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर भी परसेप्शन की लड़ाई शुरू हो गई थी. कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका भी इसमें कूदे थे. मामला जब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा तो दोनों को पोस्ट हटाना पड़ा है.
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास ने भाजपा नेता गौरव भाटिया के खिलाफ की गई सोशल मीडिया पोस्ट को हटा दिया है.
Gaurav Bhatia vs Saurav Das: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के टॉप लीडर्स को बैकफुट पर जाना पड़ा है. CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका ने भाजपा नेता गौरव भाटिया को लेकर सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया था. गौरव भाटिया इसे मानहानि वाला बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी. 10 सितंबर 2026 शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस बात की जानकारी दी गई कि सौरव और आशुतोष ने पोस्ट को हटा दिया है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर बिना वेरिफिकेशन किए गए पोस्ट को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को अपने स्तर पर पोस्ट हटाने का सुझाव दिया. अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि विरोध करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, लेकिन बिना तथ्यों की पुष्टि किए इस तरह हमला करना सही नहीं है.
2 करोड़ का मानहानि का दावा
जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ भाटिया की ओर से दायर दो करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे पर सुनवाई कर रही थी. मामला 5 सितंबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दास और रांका की ओर से किए गए एक पोस्ट से जुड़ा है. भाटिया का आरोप है कि पोस्ट में उनके नाम और तस्वीर के साथ एक AI जेनरेटेड फर्जी बयान प्रसारित किया गया, जिसमें उन्हें स्वतंत्रता भारद्वाज को कथित तौर पर दिमागी नक्सली और जातिवादी कहने वाला बताया गया. भाटिया के मुकदमे के अनुसार, उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था. उनका आरोप है कि दोनों नेताओं ने महज किसी बयान की आलोचना नहीं की, बल्कि जनता के सामने गलत तरीके से यह पेश किया कि उन्होंने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया था. याचिका में कहा गया है कि उनकी तस्वीर के साथ फर्जी बयान जोड़कर उनके और कथित आपत्तिजनक सामग्री के बीच गलत संबंध स्थापित किया गया.
….और फिर दी यह जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, ‘‘आपके पास अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन कभी-कभी अभिव्यक्ति को अधिक स्पष्ट और बेहतर तरीके से रखना चाहिए, ताकि आपका इरादा सही तरीके से सामने आए.’’ अदालत ने यह भी कहा कि दोनों आरोपी युवा हैं और उन्हें लंबे समय तक आगे बढ़ना है, इसलिए अदालतों में समय बिताने के बजाय मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने पर विचार करना चाहिए. सौरव दास की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित ट्वीट पहले ही हटा दिया गया है. इस पर अदालत ने कहा कि पोस्ट हटाने के अलावा कुछ अन्य सामग्री भी सामने आई है और उस पर भी विचार करना होगा. पीठ ने दोनों नेताओं के वकील से निर्देश लेकर यह बताने को कहा कि क्या वे अन्य संबंधित पोस्ट भी स्वेच्छा से हटाने को तैयार हैं. अदालत ने कहा कि वह फिलहाल सीधे टेकडाउन आदेश जारी नहीं करना चाहती.
अभिजीत दिपके को पक्षकारों की लिस्ट से हटाने की मांग
मामले में CJP के अभिजीत दिपके को भी पक्षकार बनाया गया है. उनके वकील नकुल गांधी ने कहा कि दिपके के खिलाफ कोई ट्वीट या आरोप नहीं है और उन्हें पक्षकारों की सूची से हटाया जाना चाहिए. अदालत ने भी पूछा कि दिपके और CJP को मामले में पक्षकार क्यों बनाया गया है. भाटिया की ओर से हालांकि कहा गया कि सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाने वाला एक पूरा ‘‘इकोसिस्टम’’ काम कर रहा है. गौरव भाटिया ने मुकदमे में CJP और उसके नेताओं पर न्यायपालिका के खिलाफ लगातार ऐसी टिप्पणियां करने का आरोप भी लगाया है, जो उनके अनुसार संस्थागत गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं. उन्होंने सौरव दास की न्यायिक मामलों से जुड़ी पूर्व सोशल मीडिया टिप्पणियों का भी उल्लेख किया है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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