Sultanpur News: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में कुछ ऐसे स्थान हैं. जिनका नाम सुनकर आपको कुछ अजीब लगेगा इसी तरह एक स्थल है कूरेभार जिसका नाम सुनकर आपको कूड़ा और कचरा से जुड़ाव लगता होगा, लेकिन दरअसल इस स्थल के नाम के पीछे की कहानी से जुड़ी हुई है.
जब सुल्तानपुर में था भर राजवंश का शासन
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि करीब 800 से 850 वर्ष पहले सुल्तानपुर और आसपास के बड़े इलाकोन में भर राजवंश का प्रभाव था. इसी दौड़ से सुल्तानपुर के कई पुराने स्थानों और उनके नामों को जोड़कर देखा जाता है. स्थानीय इतिहास और प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इसी कालखंड में भर राजाओं का इस क्षेत्र पर शासन हुआ करता था. कहा जाता है कि इस क्षेत्र के इतिहास में कयी ऐसे शासक हुए, जिनके नाम और उनसे जुड़ी घटनाओं ने अलग-अलग स्थानों की पहचान को प्रभावित किया.
राजा कूड़ और कूरेभार के नाम की कहानी
कूरेभार के नाम को लेकर एक प्रचलित मान्यता राजा कूड़ से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि भर राजवंश के शासनकाल में राजा कूड़ का इस क्षेत्र से संबंध था और उन्हीं से जुड़ी एक घटना के कारण इस स्थान का नाम कूड़ेभार पड़ा. समय के साथ बोलचाल में यह नाम बदलता गया और आज लिखित रूप में इसे कूरेभार कहा जाता है. आज का कूरेभार कैसा है,
आज कूरेभार सुल्तानपुर जिले का एक प्रमुख इलाका है, जो अयोध्या की सीमा से सटा हुआ है. यहां थाना है और समय के साथ कूरेभार एक विकसित बाजार के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी है. लेकिन बाजार और आधुनिक इमारतों के बीच छिपा इसका पुराना इतिहास हमें याद दिलाता है कि किसी जगह का नाम सिर्फ एक नाम नहीं होता. उसके पीछे सदियों पुरानी कहानी, सत्ता, समाज और स्थानीय परंपराओं की छाप छिपी हो सकति है.
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