मैच खत्म होने के बाद अपनी कप्तान वाली जिम्मेदारी और जज्बे को बयां करते हुए रिंकू सिंह (Rinku Singh) ने कहा कि वह अपनी टीम के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी तरह की शारीरिक चोट का सामना ही क्यों न करना पड़े. क्वालीफायर 1 की हार को याद करते हुए रिंकू ने भावुक अंदाज में कहा, ‘कल मुझे लग रहा था कि अगर मैं थोड़ा और स्वस्थ होता और कोई बल्लेबाज मेरे साथ अंत तक टिक पाता, तो हम वह मुकाबला जीत सकते थे. आज भी स्थिति वैसी ही बनी हुई थी. मैंने पेनकिलर ली और खेलने उतर गया. हालांकि हाथ में थोड़ा सुधार महसूस हो रहा था, लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मैं अभी भी काफी दर्द में हूं.’
रिंकू सिंह पेनकिलर खाकर बल्लेबाजी के लिए उतरे.
लड़खड़ाते शीर्ष क्रम के बीच कप्तानी पारी
135 रनों के मामूली लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेरठ मावेरिक्स (Meerut Maverics) की शुरुआत एक बार फिर निराशाजनक रही. टीम का शीर्ष क्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया और एक समय मावेरिक्स ने केवल 61 रन के स्कोर पर अपने 4 अहम विकेट गंवा दिए थे. ऐसे संकट के समय रिंकू सिंह ने मोर्चा संभाला. उन्होंने 23 गेंदों में नाबाद 37 रनों की संयमित और सूझबूझ भरी पारी खेली. उनका साथ युवा खिलाड़ी यश गर्ग ने निभाया, जिन्होंने 44 गेंदों में नाबाद 56 रन बनाकर अपनी टीम को जीत की दहलीज के पार पहुंचाया.
टॉप ऑर्डर की इस नाकामी को स्वीकार करते हुए रिंकू ने कहा कि उनकी बल्लेबाजी लाइन-अप उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है. उन्होंने बताया कि इस नॉकआउट मुकाबले से पहले उन्होंने बल्लेबाजों से मानसिक रूप से मजबूत होने, तैयारी को बेहतर करने और मैच को गहराई तक ले जाने की रणनीति पर विशेष चर्चा की थी.
मुश्किल परिस्थितियों में बल्लेबाजी का गणित
रिंकू सिंह के लिए लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच फिनिश करना अब कोई नई बात नहीं रह गई है. उन्होंने अपनी बल्लेबाजी के इस हुनर पर बात करते हुए बताया कि जब आप लंबे समय से एक ही क्रम पर बल्लेबाजी करते हैं, तो यह आपकी आदत में शुमार हो जाता है. मैदान पर उतरते ही दिमाग में गणित चलने लगता है कि किस गेंदबाज के खिलाफ हमला करना है, स्ट्राइक कैसे रोटेट करनी है और क्रीज के भीतर कितनी गहराई में खड़ा होना है. इतने सालों तक इस दबाव की स्थिति को झेलने के कारण अब यह उनके स्वभाव का हिस्सा बन चुका है.
गेंदबाजों का पलटवार और रिंकू का मास्टरस्ट्रोक
इस मुकाबले में जहां मावेरिक्स की बल्लेबाजी मध्यक्रम पर निर्भर दिखी, वहीं उनके गेंदबाजों ने मैच का रुख मोड़ने में अहम भूमिका निभाई. नोएडा किंग्स ने धमाकेदार शुरुआत की थी, लेकिन मेरठ के गेंदबाजों ने शिकंजा कसते हुए उन्हें 20 ओवरों में 8 विकेट पर 134 रन पर ही रोक दिया. रिंकू ने गेंदबाजों की तारीफ करते हुए कहा कि पहले 10 ओवरों में नोएडा ने शानदार बल्लेबाजी की और मेरठ की ओर से गेंदबाजी में कुछ कमियां रहीं. हालांकि, 10वें ओवर के बाद जब जीशान अंसारी गेंदबाजी करने आए और उन्होंने शौर्य को आउट किया, तो वहां से मेरठ के हाथ में मैच का मोमेंटम आ गया. इसके तुरंत बाद रवि का विकेट गिरते ही नोएडा पर दबाव पूरी तरह से बन गया.
इस मैच में रिंकू सिंह ने न केवल अपनी बल्लेबाजी बल्कि अपनी दूरदर्शी कप्तानी का भी परिचय दिया. मैच के 19वें ओवर में रिंकू ने खुद गेंदबाजी करने का एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया. उन्होंने अपनी इस रणनीति से विरोधी टीम के कप्तान प्रशांत वीर का महत्वपूर्ण विकेट हासिल किया. रिंकू ने बताया कि उन्होंने पहले ही जीशान से कह दिया था कि वह प्रशांत को आउट कर सकते हैं और उनका यह भरोसा टीम के लिए पूरी तरह सही साबित हुआ.
खिताबी जंग भुवनेश्वर कुमार की टीम से रविवार को
इस जीत के साथ ही मेरठ मावेरिक्स ने राहत की सांस ली है. अब कप्तान रिंकू सिंह और उनकी टीम थोड़ा आराम करने और अपनी चोटों से उबरने की कोशिश करेगी. रविवार को होने वाले फाइनल में मेरठ मावेरिक्स का सामना भुवनेश्वर कुमार की कप्तानी वाली लखनऊ फाल्कन्स से होगा, जहां टीम अपने इस जुझारू जज्बे को बरकरार रखते हुए खिताब अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगी.
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