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नई दिल्ली. वेटरन उद्योगपति रतन टाटा के जाने के बाद से ही टाटा समूह में उठापटक जारी है. समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने अगले बॉस के चुनाव की है. टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले साल फरवरी में समाप्त हो जाएगा. उससे पहले ही समूह ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश तेज कर दी है और इसके लिए तीन प्रमुख कॉरपोरेट दिग्गजों पर दांव लगाने की संभावना है. फिलहाल रेस में शामिल टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) टीवी नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक एवं समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल और एनएसई के एमडी एवं सीईओ आशीष चौहान का नाम सबसे आगे चल रहा है.

सूत्रों के अनुसार, जहां समूह के आंतरिक उम्मीदवारों में नरेंद्रन का नाम सबसे आगे चल रहा है, वहीं अग्रवाल भी अपने निवेश बैंकिंग और पूंजी आवंटन अनुभव के साथ दौड़ में बने हुए हैं. दूसरी ओर, भारत के पूंजी बाजारों के दिग्गज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के संस्थापक अधिकारियों में से एक चौहान इस दौड़ में अप्रत्याशित दावेदार साबित हो सकते हैं. चयन प्रक्रिया अभी जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. अगला चेयरमैन चुनने में टाटा संस के बोर्ड और होल्डिंग कंपनी को नियंत्रित करने वाले ट्रस्टों की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है.

सरकार को भी बता दिए नाम
सूत्रों का कहना है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने फिलहाल छांटे गए तीनों उम्मीदवारों के नाम शीर्ष सरकारी नेतृत्व को बता दिए हैं और नामों पर गहन विचार-विमर्श के बाद फैसला होने की संभावना है. टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस ने इस बारे में टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. चंद्रशेखरन, जिन्होंने साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और वर्तमान में अपना दूसरा 5 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. उन्होंने अगस्त में घोषणा की थी कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने पर वह खुद की दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे.

नोएल टाटा का नाम भी शामिल
फिलहाल समूह की ओर से उत्तराधिकारी खोजने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी नाम की पुष्टि नहीं की गई है. सामने आए अन्य नामों में स्वयं नोएल टाटा भी शामिल हैं, जो समिति द्वारा समय पर प्रक्रिया पूरी न कर पाने की स्थिति में अंतरिम चेयरमैन के रूप में कार्य कर सकते हैं. इनके अलावा टाटा संस की समूह मुख्य डिजिटल अधिकारी आरती सुब्रमण्यन, टाटा मोटर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शैलेश चंद्र और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा के नाम भी चर्चा में आए हैं.

चौंका सकता है आशीष चौहान का नाम
मामले से परिचित लोगों के अनुसार टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एनएसई के एमडी एवं सीईओ आशीष चौहान चेयरमैन के तौर पर एक चौंकाने वाली पसंद हो सकते हैं. दूसरी ओर, नरेंद्रन अपने साथ टाटा का लंबा अनुभव लाते हैं और शीर्ष पद के लिए स्वाभाविक आंतरिक दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन उनका करियर लगभग पूरी तरह से टाटा स्टील के भीतर रहा है और होल्डिंग-कंपनी के स्तर पर तथा पूंजी आवंटन में उनका अनुभव अपेक्षाकृत कम है. इस लिहाज से चौहान का प्रोफाइल बिल्कुल अलग है. एनएसई प्रमुख के पास प्रौद्योगिकी, पूंजी बाजार, वित्तीय सेवाओं और संस्था निर्माण का गहरा अनुभव है. वह साल 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना में मदद करने वाले अधिकारियों में शामिल थे और बाद में साल 2022 में एनएसई प्रमुख के रूप में लौटने से पहले उन्होंने बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के एमडी और सीईओ के रूप में काम किया था.

चौहान की एजुकेशन भी दमदार
आईआईटी मुंबई से स्नातक और आईआईएम कलकत्ता से पीजी में प्रबंधन की डिग्री रखने वाले चौहान ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम किया है. वर्तमान में वह एनएसई के 30,000 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का नेतृत्व कर रहे हैं, जो अब तक के भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा. इसके साथ ही एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये हो जाएगा और यह बाजार पूंजीकरण के हिसाब से 10वीं सबसे मूल्यवान भारतीय कंपनी बन सकती है.

चौहान का अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत
सूत्रों का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी टाटा समूह को पूरी तरह से अनजान चेहरा लाए बिना एक बाहरी विकल्प प्रदान कर सकती है. चौहान पूंजी बाजार और बड़े संस्थानों के प्रौद्योगिकी-संचालित बदलाव को समझते हैं, जबकि उनका अनुभव कॉरपोरेट प्रबंधन, वित्त और प्रौद्योगिकी तक फैला हुआ है. उन्होंने कहा कि वह भारत के नियामक और नीतिगत परिवेश से भी भली-भांति परिचित हैं. हालांकि, टाटा संस की चेयरमैनशिप विशेष रूप से एक चुनौतीपूर्ण भूमिका है. चौहान को पूंजी बाजारों की विशिष्ट और अत्यधिक रेगुलेटेड दुनिया से निकलकर 30 से अधिक व्यवसायों और 10 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले समूह की निगरानी का जिम्मा संभालना होगा.

कमजोर नहीं नरेंद्रन की दावेदारी
टीवी नरेंद्रन शुरुआती दौर में सबसे चर्चित नाम रहे हैं और सबसे मजबूत आंतरिक उम्मीदवार बने हुए हैं. उन्होंने साल 1988 से लेकर अभी तक समूह के साथ तीन दशक से अधिक समय बिताया है और एक दशक से अधिक समय से टाटा स्टील का नेतृत्व सीईओ और एमडी के रूप में कर रहे हैं. उन्होंने टाटा स्टील को अस्थिर वैश्विक जिंस चक्रों, भारी पूंजीगत व्यय और कठिन यूरोपीय ऑपरेशनल के दौर से बाहर निकाला है, जो टाटा संस के पूर्व चेयरमैनों के लिए भी एक चुनौती थी. नरेंद्रन की असल चुनौती आईटी और ऑटोमोबाइल से लेकर विमानन, उपभोक्ता व्यवसाय और नए जमाने के विनिर्माण तक फैले विशाल पोर्टफोलियो के प्रबंधन में बदलने की होगी.

सौरभ अग्रवाल भी कमजोर नहीं
चेयरमैन के तौर पर सौरभ अग्रवाल स्पष्ट रूप से वित्त और रणनीति आधारित आंतरिक विकल्प का प्रतिनिधित्व करते हैं. वह साल 2017 में चंद्रशेखरन के तहत समूह सीएफओ के रूप में टाटा संस में शामिल हुए थे और वर्तमान में कार्यकारी निदेशक और समूह सीएफओ के रूप में काम कर रहे हैं. उनकी जिम्मेदारियां एक पारंपरिक सीएफओ से कहीं ज्यादा हैं. इसमें पूंजी आवंटन, निवेश-प्रबंधन निर्णय और पूरे समूह में पोर्टफोलियो का अनुकूलन शामिल है. उनकी उम्मीदवारी विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाती है, क्योंकि टाटा संस भारी पूंजी आवश्यकताओं के दौर का सामना कर रहा है. फिलहाल नरेंद्रन सबसे मजबूत आंतरिक उम्मीदवार बने हुए हैं, जबकि अग्रवाल वित्त केंद्रित विकल्प प्रदान कर रहे हैं. दूसरी ओर प्रौद्योगिकी, वित्तीय-बाजार विशेषज्ञता और संस्थागत नेतृत्व का चौहान का अनुभव उन्हें एक अप्रत्याशित दावेदार बनाता है.

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