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लोकनायक अस्पताल के डॉक्टरों ने 95 वर्षीय बुजुर्ग के पेट की न सिर्फ कैंसर की सर्जरी की बल्कि पूरा पेट निकालकर छोटी आंत की मदद से नया पेट भी बना दिया। करीब साढ़े तीन घंटे चली इस सर्जरी के बाद मरीज ने चौथे दिन चलना-फिरना भी शुरू कर दिया। 

मरीज पिछले करीब दो महीने से बार-बार खून की उल्टी से परेशान थे। उन्हें उपचार के लिए एक निजी अस्पताल से लोकनायक अस्पताल रेफर किया गया था। यहां एंडोस्कोपी और सीटी स्कैन की जांच में पेट में कैंसर की गांठ की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि मरीज कैंसर के साथ फेफड़ों की गंभीर बीमारी सीओपीडी से भी जूझ रहे थे। 

जांच में पता चला कि कैंसर पेट तक ही सीमित था और ज्यादा नहीं फैला था। डॉक्टरों ने टोटल रेडिकल गैस्ट्रेक्टोमी कर पूरा पेट निकाल दिया। इसके बाद छोटी आंत के एक हिस्से से जे-पाउच (इस प्रक्रिया में अंग्रेजी के अक्षर जे की तरह का एक थैली तैयार की जाती है) तैयार कर भोजन के रास्ते को दोबारा जोड़ा गया। इसके लिए जेजुनो-एसोफैगल एनास्टोमोसिस प्रक्रिया अपनाई गई। 

एनेस्थीसिया के बाद सुरक्षित होश में आना चुनौतीपूर्ण

सर्जरी विभाग के डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि 95 वर्ष की उम्र में इतनी बड़ी सर्जरी अपने आप में चुनौतीपूर्ण थी। खासकर एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से होश में लाना और ऑपरेशन के बाद उनकी सांस की स्थिति संभालना बेहद महत्वपूर्ण था।

सीओपीडी भी बढ़ा रहा था जोखिम

सीओपीडी के कारण जोखिम और बढ़ गया था। सर्जरी से पहले मरीज के फेफड़ों की स्थिति बेहतर करने के लिए स्पायरोमेट्री, स्टीम इनहेलेशन और चेस्ट फिजियोथेरेपी कराई गई। डॉक्टरों ने परिवार को भी इस उम्र में होने वाली बड़ी सर्जरी के संभावित जोखिमों के बारे में विस्तार से बताया।

जेजुनो-एसोफैगल में ग्रासनली और छोटी आंत को जोड़ा जाता है

यह एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है। इस सर्जरी में भोजन नली (ग्रासनली और छोटी आंत के बीच वाले हिस्से (जेजुनम) को आपस में जोड़ा जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को कुछ दिनों तक आईसीयू में निगरानी में रखा गया। अब उनकी आंतों ने काम करना शुरू कर दिया है और उन्हें भूख भी महसूस होने लगी है।

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