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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, कार्यालयों में बढ़ा प्रशासनिक बोझ, मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, उच्चस्तरीय जांच की मांग

दिनेश देशवाल

नूंह।

नूंह के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों को उप-सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिविल सर्जन कार्यालय नूंह, मांड़ीखेड़ा में उप-सिविल सर्जन के 9 पद स्वीकृत हैं, जबकि 14 डॉक्टरों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। आरटीआई से प्राप्त सूचना के आधार पर सामने आए इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिरोजपुर झिरका के बसई निवासी शिकायतकर्ता चुन्नी लाल ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में पूछा गया है कि यदि स्वीकृत पदों की संख्या 7-8 है तो उससे अधिक डॉक्टरों को उप-सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार किस नियम के तहत और किस सक्षम अधिकारी के आदेश पर दिया गया।

डॉक्टर कम, प्रशासनिक जिम्मेदारियां ज्यादा

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिले के सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टरों तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि मरीजों के इलाज के लिए जरूरी डॉक्टरों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अतिरिक्त प्रभार पाने वाले डॉक्टर प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण अपनी चिकित्सकीय सेवाओं से दूर हो रहे हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उप-सिविल सर्जन के अतिरिक्त प्रभार पर तैनात कई डॉक्टर नियमित ओपीडी नहीं देखते। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

चहेतों को जिम्मेदारी देने का भी आरोप

अतिरिक्त प्रभार बांटने की प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि डॉक्टरों को वरिष्ठता और कनिष्ठता के निर्धारित क्रम के बजाय कथित तौर पर पसंदीदा डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई। शिकायतकर्ता ने इसे जांच का विषय बताते हुए पिछले एक वर्ष में अतिरिक्त प्रभार देने, बदलने और समाप्त करने से संबंधित सभी आदेशों, स्वीकृतियों तथा विभागीय पत्राचार की जांच कराने की मांग की है।

इसके साथ ही यह भी जांचने की मांग की गई है कि अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे डॉक्टर अपने मूल चिकित्सकीय दायित्वों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि जांच में स्वीकृत पदों से अधिक अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की पुष्टि होती है तो शिकायतकर्ता ने इन्हें तत्काल पुनर्विचारित अथवा समाप्त कर डॉक्टरों को उनके मूल कार्यस्थलों पर मरीजों की सेवा में लगाने की मांग की है।

जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर

अब निगाहें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। यदि उच्चस्तरीय जांच होती है तो पिछले एक साल के आदेशों और प्रभार वितरण का रिकॉर्ड खंगालने से यह स्पष्ट हो सकता है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियां किस आधार पर दी गई और इसका सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सेवाओं पर क्या असर पड़ा।वहीं उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और उसके आधार पर आगामी कदम उठाया जाएगा।

फोटो: सिविल सर्जन कार्यालय, नूंह।

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