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Hyderabad News: हैदराबाद के जियागुड़ा में एक पुराने पीपल के पेड़ का तना इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. पेड़ की छाल पर भगवान गणेश के मुख और सूंड जैसी प्राकृतिक आकृति उभरने के बाद स्थानीय लोग इसे दैवीय संकेत मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं, हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह पेड़ में बनने वाली प्राकृतिक गांठ और मानव मस्तिष्क की ‘पेरीडोलिया’ प्रवृत्ति का उदाहरण माना जा सकता है.
हैदराबाद. पुराने शहर क्षेत्र स्थित जियागुड़ा में एक पीपल का पेड़ इन दिनों स्थानीय लोगों के बीच चर्चा और आस्था का केंद्र बना हुआ है. इस पुराने पेड़ के तने की छाल पर भगवान श्री गणेश के मुख और सूंड जैसी प्राकृतिक आकृति उभर आई है. जैसे ही आसपास के लोगों का ध्यान इस अनोखी बनावट पर गया, इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी. कई स्थानीय निवासियों ने इसे दैवीय संकेत मानते हुए वहां धूप-दीप जलाकर नियमित पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी है.
भारतीय परंपरा में पीपल के वृक्ष को पहले से ही बेहद पवित्र और पूजनीय माना जाता है. ऐसे में तने पर उभरी इस विशेष बनावट ने श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई इंसानी कारीगरी नहीं है बल्कि पेड़ के तने का प्राकृतिक स्वरूप है जो बिल्कुल विघ्नहर्ता गणेश के स्वरूप जैसा प्रतीत होता है. दूसरी ओर, वनस्पति विज्ञान और वैज्ञानिकों का नजरिया इस मामले पर पूरी तरह तार्किक और वैज्ञानिक है इसे अलौकिक चमत्कार के बजाय प्रकृति की सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण में पेड़ों के तने में चोट लगने, कीटों के प्रभाव या कोशिकाओं के असमान विभाजन के कारण बर्ल यानी लकड़ी की गांठें बन जाती हैं. पीपल और बरगद जैसे विशाल पेड़ों में समय के साथ छाल मुड़ती है और कई तरह के असामान्य आकार ले लेती है. मनोविज्ञान में इसे पेरीडोलिया कहा जाता है यह मानव मस्तिष्क की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है जिसके तहत इंसान अमूर्त आकृतियों, बादलों, पत्थरों या पेड़ों की छाल में जाने-पहचाने चेहरे या धार्मिक प्रतीक देखने लगता है. कुल मिलाकर जियागुड़ा का यह पीपल का पेड़ वर्तमान में आस्था और विज्ञान के संगम का दिलचस्प उदाहरण बन चुका है. जहां एक तरफ श्रद्धालु इसे भगवान का आशीर्वाद मानकर नमन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिक इसे प्रकृति का सामान्य जैविक विकास और इंसानी सोच का परिणाम बताते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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