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  • स्नैचिंग रोकने को रात में बॉर्डर सील, संदिग्धों की चेकिंग और अपराधियों के सत्यापन पर जोर
  • 2024 में 293 से घटकर 2025 में 245 और 2026 में अब तक 79 हुईं चेन स्नैचिंग की घटनाएं
  • यक्ष ऐप से 33,978 अपराधियों का सत्यापन, 14,745 सीसीटीवी कैमरों की फीडिंग से मजबूत हुई तकनीकी निगरानीउदय भूमि संवाददाता
    गाजियाबाद। कमिश्नरेट गाजियाबाद में सड़क अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड़ की कार्यशैली का असर अब अपराध के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। नियमित गश्त, रात्रिकालीन नाकाबंदी, बॉर्डर क्षेत्रों में सघन चेकिंग, अपराधियों के सत्यापन और तकनीक के इस्तेमाल को पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाकर चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं को नियंत्रित करने की दिशा में लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में जहां चेन स्नैचिंग की 293 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 245 रह गई। वर्ष 2026 में 15 अगस्त तक चेन स्नैचिंग की 79 घटनाएं दर्ज हुई हैं।

पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड़ ने सड़क पर होने वाले अपराधों को लेकर अधिकारियों और थाना प्रभारियों को स्पष्ट रणनीति के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर ऐसे अपराधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है, जो पहले स्नैचिंग, लूट, चोरी और वाहन चोरी जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। पुलिस की कोशिश है कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के साथ ही अपराध की संभावना को पहले ही खत्म किया जाए। इसी सोच के तहत संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की लगातार जांच करने पर जोर दिया जा रहा है।

बाहरी जिलों से आने वाले अपराधियों पर विशेष नजर
पुलिस के सामने चेन स्नैचिंग रोकने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक दूसरे जिलों से आने वाले अपराधी हैं। इस वर्ष 15 अगस्त तक स्नैचिंग के मामलों में गिरफ्तार 91 अभियुक्तों में 28 कमिश्नरेट गाजियाबाद और 63 गैर-जनपद के अपराधी शामिल हैं। यानी गिरफ्तार आरोपियों में करीब 69.23 प्रतिशत अपराधी दूसरे जनपदों से जुड़े पाए गए। इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस कमिश्नर ने सीमावर्ती और संवेदनशील बॉर्डर क्षेत्रों में रात के समय नाकाबंदी और सघन चेकिंग को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।

प्रत्येक थाने से करीब 25 प्रतिशत पुलिसकर्मियों की टीम बनाकर रात्रिकालीन चेकिंग कराई जा रही है। संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की गहन जांच के साथ बाहरी जिलों से आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान और उनके आवागमन पर निगरानी रखी जा रही है। पुलिस की यह रणनीति खास तौर पर उन अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए अपनाई गई है, जो वारदात के बाद दूसरे जिले में भाग निकलते हैं। अपराधियों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। उनके खिलाफ बीएनएसएस की धारा 129बी, गुंडा एक्ट, जिला बदर और अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है। गंभीर मामलों में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी पुलिस की ओर से की गई है।

तकनीक बनी पुलिस की ताकत
जे. रविन्दर गौड़ की पुलिसिंग में तकनीकी निगरानी को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए यक्ष ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार अब तक ऐप पर 33,978 यानी करीब 99 प्रतिशत अपराधियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। अपराधियों के फोटो सहित विवरण दर्ज करने के साथ उनके निवास स्थान की जियो-टैगिंग भी की गई है। इसके अलावा कमिश्नरेट की 2,132 बीटों के अंतर्गत 3,680 गलियों और मोहल्लों की जियो-टैगिंग की जा चुकी है।

वहीं 14,745 सीसीटीवी कैमरों की फीडिंग भी यक्ष ऐप में की गई है। इससे किसी वारदात के बाद संदिग्धों की पहचान करने और उनके आवागमन का पता लगाने में पुलिस को मदद मिल रही है। इस तकनीकी नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी निगरानी, अपराधियों के डिजिटल सत्यापन और जियो-टैगिंग के कारण पुलिस की पहुंच और निगरानी क्षमता पहले के मुकाबले अधिक प्रभावी हुई है। किसी क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर संबंधित बीट और थाना पुलिस को तेजी से सक्रिय किया जा सकता है।

गश्त से लेकर गिरफ्तारी तक एक्शन पर जोर
पुलिस कमिश्नर का जोर ऐसी पुलिसिंग पर है जिसमें गश्त, चेकिंग और तकनीकी निगरानी के साथ अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी हो। जनवरी से 15 अगस्त तक डकैती, लूट, स्नैचिंग, नकबजनी, चोरी और वाहन चोरी जैसे अपराधों में भी पुलिस ने कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के सत्यापन और लगातार निगरानी से सड़क अपराधों पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिली है। जे. रविन्दर गौड़ ने कहा कि कमिश्नरेट में आमजन की सुरक्षा और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि बाहरी जनपदों से आने वाले अपराधियों की पहचान कर उनकी गतिविधियों पर रोक लगाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन लगातार बॉर्डर चेकिंग और निगरानी के जरिए इस चुनौती से निपटा जा रहा है।

पुलिस कमिश्नर की रणनीति में अपराधियों की पहचान से लेकर उनके सत्यापन, संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी, रात्रि गश्त, बॉर्डर चेकिंग और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल तक सभी पहलुओं को जोड़ा गया है। चेन स्नैचिंग के आंकड़ों में लगातार आई कमी को पुलिस इसी निरंतर और परिणामोन्मुख कार्रवाई का परिणाम मान रही है। कमिश्नरेट पुलिस का कहना है कि आने वाले समय में भी अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, तकनीकी निगरानी और प्रभावी गश्त जारी रहेगी। पुलिस का लक्ष्य सड़क अपराधों को और कम करने के साथ आमजन के बीच सुरक्षा की भावना को मजबूत करना है।

-जे. रविन्दर गौड़
पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद।

कमिश्नरेट गाजियाबाद में आमजन की सुरक्षा और सड़क अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की ओर से केवल वारदात के बाद कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय अपराध की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रात्रिकालीन गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी, सीमावर्ती इलाकों में नाकाबंदी और संदिग्ध वाहनों एवं व्यक्तियों की सघन जांच लगातार कराई जा रही है। दूसरे जनपदों से आने वाले अपराधियों की भूमिका भी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर निगरानी के लिए बॉर्डर क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पूर्व में आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे लोगों का सत्यापन कर उनकी वर्तमान गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
-जे. रविन्दर गौड़
पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद।

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