यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं. दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा रणनीतिकारों की इस मुलाकात से सीमा पर जारी गतिरोध को खत्म करने में बड़ी प्रगति की उम्मीद है.
सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि दोनों प्रतिनिधियों के LAC पर मौजूदा जमीनी हालात का विस्तृत आकलन करने की उम्मीद है. यह घटनाक्रम अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सेना के आक्रामक रवैये की हालिया खबरों के बीच सामने आया है.
एजेंडा में क्या है?
विशेष प्रतिनिधियों की व्यवस्था के तहत, डोभाल और वांग यी से उम्मीद है कि वे 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर व्यापक विवाद को सुलझाने के लिए आपसी सहमति वाले तौर-तरीकों पर विचार करेंगे.
अरुणाचल प्रदेश में हाल ही में चीनी गतिविधियों की खबरों के बीच, बातचीत में शांति बनाए रखने और नए तनाव से बचने पर जोर दिया जाएगा. दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 में हुए डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने) के समझौतों और उसके बाद सैन्य टकराव कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों की समीक्षा भी करेंगे.
प्रतिनिधि पेट्रोलिंग के अधिकारों को बहाल करने और 2020 में गलवान घाटी संकट के बाद शुरू हुई धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी चर्चा करेंगे. WMCC फ्रेमवर्क के तहत बने उस एक्सपर्ट ग्रुप पर भी चर्चा होगी, जिसे सही सेक्टरों में सीमा तय करने की दिशा में शुरुआती कदम उठाने का काम सौंपा गया है.
डोभाल और वांग मौजूदा वेस्टर्न सेक्टर मैकेनिज़्म के साथ-साथ ईस्टर्न और मिडिल सेक्टर में जनरल लेवल मैकेनिज़्म सहित बॉर्डर मैनेजमेंट के ढांचे को मज़बूत करने पर भी चर्चा करेंगे. वे भारत-चीन के कुल संबंधों और ‘राजनीतिक पैरामीटर और गाइडिंग प्रिंसिपल्स’ पर 2005 के समझौते को मजबूत करने की समीक्षा भी करेंगे.
शी जिनपिंग का भारत दौरा
इन बातचीत का मकसद 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है. इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे.
हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे. उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है. मोदी और शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन समिट के दौरान हुई थी.
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