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Sugar Price Hike Nepal Border Report : ​बहराइच और रुपईडीहा के स्थानीय निवासियों और व्यापारी भी चीनी महंगी होने को लेकर बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि नेपाल में चीनी के रेट ज्‍यादा होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में नेपाली ग्राहक भारतीय दुकानों पर पहुंच रहे हैं. दामों का यह बड़ा अंतर सीमावर्ती बाजारों में चीनी की मांग को लगातार बढ़ा रहा है, जिससे रुपईडीहा के स्थानीय कारोबार में भी हलचल तेज हो गई है. हालांकि मजबूरन यह कम चीनी की खपत वाले नेपाली नागरिक नेपाल से भी महंगे रेट में चीनी की खरीदारी कर रहे हैं. आइये जानते हैं इस ग्राउंड रिपोर्ट में..

बहराइच : ​बहराइच जिले से सटे भारत नेपाल सीमा रुपईडीहा बॉर्डर पर इन दिनों चीनी की कीमतों को लेकर भारी घमासान देखने को मिल रही है. एक तरफ जहां चीनी की बढ़ती कीमतों पर चर्चा खासा है, वहीं दूसरी तरफ भारत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में इसके दामों को लेकर एक अलग ही गणित देखने को मिल रहा है. लोकल 18 की टीम जब जमीनी हकीकत जानने इंडो नेपाल बॉर्डर पर पहुंची, तो वहां के बाजारों का नजारा बेहद दिलचस्प नजर आया. नेपाल में चीनी के आसमान छूते दामों के कारण अब सीमा पार के लोग चीनी खरीद के साथ ही अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय सीमा में स्थित बहराइच के रुपईडीहा बाजार का रुख कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि चीनी केवल यहीं महंगी हुई है, सीमा पार भी चीनी के दामों में उछाल आया है. लिहाजा, यहां से नेपाली लोग खूब चीनी खरीदकर उधर ले जा रहे हैं. आइये जानते हैं इस ग्राउंड रिपोर्ट में…

नेपाली नागरिक राज थापा ने चीनी को लेकर बताई अहम बातें
लोकल 18 टीम ने जब नेपाल बॉर्डर पर लोगों से बातचीत करना शुरू किया तब नेपाली नागरिक राज थापा ने लोकल 18 के कैमरे पर आकर चीनी को लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया नेपाल में चीनी की कीमत इंडिया के मुकाबले अधिक है. इसके अलावा नेपाल में चीनी का रेट स्थिर नहीं है. पहाड़ पर चीनी 800 रुपये प्रति 5 किलो है तो कहीं पर 700 रुपये. इस हिसाब से देखा जाए तो नेपाल के मुकाबले इंडिया में चीनी सस्ती है. राज थापा ने साथ में यह भी बताया है कि आसपास बॉर्डर एरिया में रहने वाले नागरिक तो भारत इंडो नेपाल बॉर्डर के बाजारों में आकर चीनी और अन्य सामग्री की खरीदारी तो कर लेते हैं, लेकिन दूर दराज में रहने वाले लोगों को महंगे ही दामों पर चीनी या अन्य सामग्री की खरीदारी करनी पड़ती है.

लोकल 18 टीम के खास बातचीत में बहराइच इंडो नेपाल बॉर्डर रुपईडीहा में रहने वाले संदीप कुमार मिश्रा ने चीनी की बड़ी कीमतों पर बातचीत में बताया कि ‘चीनी की कीमत बढ़ने से पहले नेपाल में चीनी का अंतर बहुत अधिक नहीं था. दो-चार रुपए का फर्क था, लेकिन जबसे रेट बढ़ा है, तबसे अंतर काफी आ गया है. जहां एक और नेपाल में चीनी 75 से लगाकर 100 किलो तक बिक रही है तो वहीं भारत में 60 से लगाकर 70 रुपये तक. संदीप ने बातचीत में यह भी बताया है कि जब से चीनी की कीमत बढ़ी है, तबसे नेपाली नागरिक इंडो नेपाल बॉर्डर की रुपईडीहा बाजार से चीनी की खरीदारी कर रहे हैं. खाद्य सामग्री इंडिया में हमेशा से सस्ती रही है, इसलिए नेपाली नागरिक हमेशा अपनी रोजमर्रा की जरूरत के लिए भारत की बंजारों का सहारा लंबे समय से लेते रहे हैं.

नेपाल के बहादुर ने भी चीनी पर की चर्चा
चीनी की चर्चा को लेकर जब लोकल 18 टीम बॉर्डर पर लोगों से बातचीत कर रही थी, तब नेपाली नागरिक बहादुर ने भी चीनी को लेकर अहम बातें साझा की. इन्होंने बताया कि नेपाल में चीनी महंगी है. 100 रुपये से लेकर 150 रुपए प्रति केजी तक. जबकि इंडिया में यह सस्ती है, इसलिए बहादुर भी इंडो नेपाल बॉर्डर रुपईडीहा की बाजारों से चीनी लेते हैं.

​दामों में बड़ा अंतर, नेपाल में 150 तो भारत में 65 से 70 रुपए किलो!
​ग्राउंड जीरो पर जब लोकल 18 की टीम ने नेपाली नागरिकों और भारतीय नागरिकों से बातचीत की, तो चीनी के दामों में एक भारी अंतर सामने आया. रुपईडीहा बाजार में चीनी 65 से 70 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रही है. वहीं दूसरी तरफ नेपाल के बाजारों में इसी चीनी की कीमत 120 रुपए से लेकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है. इस हिसाब से नेपाल के लोगों को भारत से चीनी खरीदने पर प्रति किलोग्राम लगभग 10 से 45 नेपाली रुपए तक की सीधी बचत हो रही है. यही वजह है कि नेपाल के नागरिक अब भारतीय बाजारों से बड़ी मात्रा में चीनी और अन्य खाद्य सामग्री खरीद रहे हैं.

​नेपाल से भारत खरीदारी करने आए लोगों ने बातचीत के दौरान साफ शब्दों में कहा कि नेपाल में महंगाई अपने चरम पर है और चीनी के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि आम आदमी के लिए इसे खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है. ऐसे में भारत का रुपईडीहा बाजार उनके लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है. सीमा पर आवाजाही आसान होने के कारण लोग नेपाल से आकर सीधे बहराइच के बाजारों से खरीदारी कर रहे हैं, जिससे उनके घरेलू बजट का संतुलन बना रहता है.

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Sandeep KumarSenior Assistant Editor

Sandeep Kumar is a senior journalist and digital newsroom leader with more than 20 years of experience in print and digital journalism. He currently serves as Senior Assistant Editor at News18 Hindi, where he l…

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