-किसान दिवस में गूंजी समस्याओं की आवाज, डीएम ने अधिकारियों को दिखाई जवाबदेही की राह
-बिजली, सिंचाई, सड़क और जल निकासी की समस्याओं पर हुई गंभीर चर्चा, लंबित शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा तय
-मोरटा में जल निकासी और रसूलपुर सिकरोड़ा की जर्जर सड़क का मुद्दा उठा, करीब 120 किसानों ने रखीं समस्याएं
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। किसानों की समस्याओं के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान को लेकर शुक्रवार को विकास भवन स्थित दुर्गावती देवी सभागार में जिला स्तरीय किसान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों ने बिजली, सिंचाई, सड़क, जल निकासी और अन्य विभागों से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को किसानों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में करीब 120 किसानों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। बैठक की शुरुआत जिला कृषि अधिकारी द्वारा पिछले किसान दिवस में प्राप्त शिकायतों की अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के साथ हुई। अधिकारियों की ओर से पूर्व में उठाई गई शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी किसानों के समक्ष रखी गई। कई समस्याओं का समाधान होने पर किसानों ने संतोष व्यक्त किया।
हालांकि कुछ शिकायतें अभी लंबित मिलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कुछ प्रकरणों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ की अध्यक्षता में टीम गठित कर जांच कराने और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़ी समस्याओं को अनावश्यक रूप से लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक के दौरान भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और अन्य किसान प्रतिनिधियों ने विभिन्न समस्याओं से संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपे। किसान प्रतिनिधियों बिजेंद्र सिंह, मनोज नागर, दक्ष नागर, प्रमोद त्यागी, चाणक्या प्रमुख, छोटे चौधरी, मनोज चौधरी, सुखदेव सिंह और धर्मदत्त त्यागी सहित अन्य किसानों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा।
किसानों ने सड़क, बिजली, सिंचाई, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की मांग की। जिलाधिकारी ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। किसान दिवस में प्रभारी उप कृषि निदेशक अमित कुमार के अलावा विद्युत, सिंचाई, गन्ना, मत्स्य, लोक निर्माण, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित शिकायतों पर किसानों को जानकारी दी।
मोरटा की जल निकासी समस्या पर डीएम सख्त
किसान दिवस में मोरटा गांव में जल निकासी की समस्या प्रमुखता से उठाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पर जिलाधिकारी ने नगर निगम और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को आपसी समन्वय के साथ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसी तरह शाहपुर से पाइपलाइन तक टूटे रास्ते का मामला भी किसानों ने उठाया। जिलाधिकारी ने नगर निगम को समस्या के जल्द समाधान के निर्देश दिए। ग्राम रसूलपुर सिकरोड़ा की सड़क पर बने गड्ढों की समस्या पर भी उन्होंने गंभीरता दिखाई और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को तत्काल सड़क की मरम्मत एवं गड्ढों को भरवाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
औपचारिक निस्तारण नहीं, चाहिए वास्तविक समाधान
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिकायतकर्ता किसान को वास्तविक और संतोषजनक समाधान मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप किसानों की शिकायतों का शीघ्र एवं पूर्ण गुणवत्ता के साथ निस्तारण सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक देरी मिली तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसान दिवस की बैठक किसानों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक में उपस्थिति अनिवार्य है। बिना उचित कारण अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण के बाद उसकी गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाए, ताकि किसान को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि किसानों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से विभागीय कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए अधिकारी स्वयं जिम्मेदारी लेकर मामलों का निस्तारण करें।
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