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खेती-किसानी में तकनीक और सही बीज का चुनाव कितना बड़ा असर डाल सकता है, इसकी बेहतरीन मिसाल इन दिनों गाजीपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में देखने को मिल रही है. कृषि विज्ञान केंद्र की मशरूम यूनिट में पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. ओंकार सिंह की अगुवाई में इस साल बटन मशरूम की खास डेल्टा स्ट्रेन प्रजाति का बंपर उत्पादन किया जा रहा है, जिसने किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है.

क्या है इस डेल्टा स्ट्रेन की खासियत?

आम तौर पर किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक अच्छे और उच्च गुणवत्ता वाले मशरूम के बीज (स्पॉन) की उपलब्धता की होती है. लेकिन केवीके में डॉ. ओंकार सिंह के मार्गदर्शन में उगाई जा रही इस नई डेल्टा स्पीशीज ने आकार और वजन के मामले में पारंपरिक मशरूम को पीछे छोड़ दिया है

वजन और साइज जानकर चौंक जाएंगे

डॉ. ओंकार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार तैयार हो रहे मशरूम का आकार सामान्य से काफी अलग और बेहतरीन है

नॉर्मल साइज: 50 से 60 ग्राम प्रति पीस
बड़ा साइज: 100 से 120 ग्राम प्रति पीस तक का भारी-भरकम मशरूम

वैज्ञानिक ने समझाया कि जब मशरूम का पिन हेड (शुरुआती छोटी अवस्था) बनना शुरू होता है, तब उसे सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मशरूम के बंपर प्रोडक्शन के लिए यह जरूरी है कि हवा में ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में हो और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम रहे.

कम्पोस्ट से लेकर पैदावार तक का चक्र

डॉ. ओंकार सिंह ने मशरूम उगाने के एक बड़े सीक्रेट से पर्दा उठाते हुए बताया कि यह प्रक्रिया दो चरणों में बंटी होती है

पहला चरण (कम्पोस्ट तैयार करते समय)-जब मशरूम का खाद या कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा होता है, तब उस दौरान कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक चाहिए होती है और ऑक्सीजन कम.

दूसरा चरण (जब मशरूम उगने लगता है)-इसके ठीक उलट, जब मशरूम का उत्पादन शुरू होने लगता है और पिन हेड बनने लगते हैं, तो ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम होनी चाहिए.

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