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नोएडा जिला अस्पताल में 2023-2025 के बीच 17 नर्स और टेक्नीशियन की भर्ती अवैध पाई गई. NHM की जांच के बाद वेतन रोका गया. नियमों का उल्लंघन कर स्थानीय स्तर पर हुई थी भर्ती. इनमें 15 स्टाफ नर्स और 2 लैब टेक्नीशियन शामिल हैं. मामला सामने आने के बाद अब इन सभी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है. भर्ती प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से गड़बड़ी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

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नोएडा: नोएडा के जिला अस्पताल में वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुई नर्स और टेक्नीशियन की भर्ती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. और इन्हें अवैध ठहराया गया है वही स्वास्थ्यकर्मी है जो तीन साल से मरीजों का इलाज और जांच कर रहे थे. शासन के निर्धारित नियमों और भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर स्थानीय स्तर पर 17 स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति कर दी गई. इनमें 15 स्टाफ नर्स और 2 लैब टेक्नीशियन शामिल हैं. मामला सामने आने के बाद अब इन सभी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है. भर्ती प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से गड़बड़ी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

नियमों को ताक पर रखकर हुई ये भर्तियां

आपको बता दें मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में इन कर्मचारियों की भर्ती वर्ष 2023 से 2025 के बीच की गई थी. आरोप है कि शासन के नियमों के तहत जिला अस्पताल स्तर पर इस तरह स्थानीय तौर पर स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती नहीं की जा सकती. इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां किए जाने का मामला सामने आया है. आरोप यह भी है कि आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की गई और इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया. अब भर्ती प्रक्रिया की वैधता और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. और जांच के घेरे में आ गई है.

जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्यवाही

जिला अस्पताल के सीएमएस अशोक कुमार झा ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आने के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा. इसके बाद लखनऊ से स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा गया, जिसमें संबंधित कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए. पत्र मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को पत्र लिखकर 17 स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने के लिए कहा. इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी है. हालांकि, इन कर्मचारियों की नियुक्ति किस स्तर पर और किन अधिकारियों की अनुमति से हुई, यह जांच का विषय बना हुआ है. और जांच के लिए टीम बनाई गई है और और बताया गया कि जोभी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी.

तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत का शक

अब पूरे मामले में सवाल उठाये जा रहे हैं कि शासन के नियमों के तहत स्थानीय स्तर पर इन पदों पर भर्ती नहीं की जा सकती थी? तो फिर 15 स्टाफ नर्स और 2 लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति कैसे हुई और किसकी अनुमति से हुई? साथ ही आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में है. फिलहाल वेतन रोके जाने की कार्रवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण है. यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी स्तर पर मिलीभगत की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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