जौनपुर की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं, बल्कि राग जौनपुरी के कारण संगीत में भी है. शर्की शासक सुल्तान हुसैन शर्की ने इसे विकसित किया था. राग जौनपुरी को लेकर संगीत के इतिहास में मान्यता है कि इसकी रचना या विकास का श्रेय जौनपुर के शर्की शासक सुल्तान हुसैन शर्की को दिया जाता है. 15वीं शताब्दी में हुसैन शर्की के शासनकाल में जौनपुर संगीत और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था. ऐतिहासिक स्रोतों में हुसैन शर्की के संगीत प्रेम और कई रागों से उनके जुड़ाव का उल्लेख मिलता है.
राग जौनपुरी को लेकर संगीत के इतिहास में मान्यता है कि इसकी रचना या विकास का श्रेय जौनपुर के शर्की शासक सुल्तान हुसैन शर्की को दिया जाता है. 15वीं शताब्दी में हुसैन शर्की के शासनकाल में जौनपुर संगीत और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था. ऐतिहासिक स्रोतों में हुसैन शर्की के संगीत प्रेम और कई रागों से उनके जुड़ाव का उल्लेख मिलता है.
आसावरी थाट का राग माना जाता है
राग जौनपुरी को आमतौर पर आसावरी थाट का राग माना जाता है. इसकी गायकी में गंभीरता, विरह और भावनात्मकता का विशेष रंग दिखाई देता है. शास्त्रीय संगीत की महफिलों में जब जौनपुरी के सुर गूंजते हैं तो उनमें जौनपुर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की झलक महसूस होती है. प्रसिद्ध गायक सूर्यप्रकाश मिश्र बल्ला गुरु जी बताते हैं कि जौनपुर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगीत में भी जौनपुर का नाम जीवित है. राग जौनपुरी इस शहर की ऐसी सांस्कृतिक पहचान है, जिसे सुनकर देश-दुनिया के संगीत प्रेमियों के सामने जौनपुर का नाम आता है. उनके मुताबिक नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना जरूरी है, ताकि जौनपुर के नाम से जुड़ी यह संगीत परंपरा आगे भी इसी तरह जीवित रहे.
शास्त्रीय संगीत के सुरों में भी गूंजता है
जौनपुर के इतिहास में शर्की काल को शिक्षा, साहित्य, कला और संगीत के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. जिला प्रशासन की ऐतिहासिक जानकारी भी जौनपुर को शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला जनपद बताती है. यही वजह है कि जौनपुर को सिर्फ शाही पुल, अटाला मस्जिद और शर्की स्थापत्य के लिए ही नहीं, बल्कि संगीत की दुनिया में अपने नाम की छाप छोड़ने वाले राग जौनपुरी के लिए भी याद किया जाता है. यानी जौनपुर ऐसा शहर है, जिसका नाम सिर्फ इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत के सुरों में भी गूंजता है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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