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एक दौर में जहां यहां अंग्रेजों के साहब ठहरा करते थे, वहीं आज यहां आम लोग अपने खास मौकों को यादगार बनाने पहुंचते हैं। यही बदलाव इस पुरानी इमारत की कहानी को और भी खास बनाता है.

खंडवा के आनंद नगर इलाके में आज भी अंग्रेजों के दौर की कई पुरानी इमारतें और गोरे सैनिकों की बैरक देखने को मिलती हैं. इन्हीं ऐतिहासिक इमारतों के बीच एक ऐसी पुरानी इमारत भी मौजूद है, जिसकी कहानी अंग्रेजों के जमाने से जुड़ी हुई बताई जाती है. कहा जाता है कि कभी इस जगह पर अंग्रेज अफसर ठहरा करते थे. यह होटल अपनी पुरानी बनावट और इतिहास के कारण आज भी खंडवा की खास पहचान बना हुआ है.

इस इमारत का निर्माण साल 1861 के आसपास अंग्रेजों के दौर में हुआ था. यह इलाका उस समय अंग्रेज अफसरों और सैनिकों की गतिविधियों से जुड़ा हुआ था. आसपास गोरे सैनिकों की बैरक भी हुआ करती थीं और इसी क्षेत्र में अंग्रेज अफसरों के ठहरने के लिए यह जगह इस्तेमाल होती थी.

अंग्रेज अफसरों के ठहरने की जगह
स्थानीय लोगों के मुताबिक अंग्रेजों के समय यहां बड़े अधिकारी और साहब ठहरा करते थे। उस दौर में खंडवा में आज जैसी होटल की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए अंग्रेज अफसरों के लिए इस तरह की विशेष इमारतों का इस्तेमाल किया जाता था.इमारत की बनावट भी अपने दौर की खास शैली को दर्शाती है. बड़े कमरे, खुला परिसर और आसपास की जगह इसे उस समय की दूसरी इमारतों से अलग बनाती थी. अंग्रेजों का दौर खत्म होने के बाद भी इस इमारत का अस्तित्व बना रहा और बाद में इसे नए रूप में इस्तेमाल किया गया.

1961 में फिर बदली इमारत की तस्वीर
स्थानीय जानकार लव जोशी बताते हैं कि साल 1961 में इस पुरानी इमारत को रिनोवेट करके होटल का रूप दिया गया. इसके बाद यह खंडवा की जानी-मानी होटलों में शामिल हो गई. बताया जाता है कि इस होटल की शुरुआत हंसकुमार कैप्रीन ने की थी और यह निजी संपत्ति के रूप में आज भी मौजूद है.लव जोशी के मुताबिक, उस दौर में इतनी सुविधाओं वाली होटल खंडवा में बहुत कम हुआ करती थीं. यही वजह थी कि यह होटल शहर की खास पहचान बन गई.

पुरानी इमारत में आज भी दिखती है इतिहास की झलक
समय के साथ होटल में कई बदलाव हुए, लेकिन इसकी पुरानी पहचान आज भी देखने को मिलती है. इमारत की बनावट और आसपास का बड़ा परिसर पुराने दौर की याद दिलाता है.आज यहां कई कमरे हैं और बड़ा गार्डन भी मौजूद है। इस गार्डन में लोग शादी, सगाई और जन्मदिन जैसे कार्यक्रम आयोजित करते हैं. यानी जिस जगह पर कभी अंग्रेज अफसर ठहरा करते थे, वही जगह आज खंडवा के लोगों की खुशियों और पारिवारिक कार्यक्रमों का हिस्सा बन चुकी है.

अंग्रेजों के दौर से आज तक कायम है पहचान
यह होटल सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि खंडवा के इतिहास का एक हिस्सा है. अंग्रेजों के दौर की यादों से जुड़ी यह इमारत समय के साथ कई बदलावों से गुजरी, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान आज भी कायम है.एक दौर में जहां यहां अंग्रेजों के साहब ठहरा करते थे, वहीं आज यहां आम लोग अपने खास मौकों को यादगार बनाने पहुंचते हैं। यही बदलाव इस पुरानी इमारत की कहानी को और भी खास बनाता है.

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