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भाजपा ने सोनिया गांधी पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वीडियो शेयर किया। भाजपा ने दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान पूरा वंदे मातरम गाया जा रहा था। कुछ शुरुआती पंक्तियों के बाद ही सोनिया इसे लेकर असहजता होने लगीं। उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। भाजपा ने दावा किया कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत खत्म होने के बाद तक परेशान दिखे। कांग्रेस ने भाजपा के आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि सोनिया ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश नहीं की। वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। 4 विजुअल्स में देखिए कार्यक्रम से जुड़ी पूरी घटना… कांग्रेस बोली- पूरा वंदे मातरम गाया गया, रोकने की कोशिश नहीं हुई कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे मामले पर कांग्रेस का पक्ष रखा। उन्होंने कहा- वंदे मातरम रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, इसलिए सोनिया गांधी कह रही थीं कि उनके लिए कुर्सी लाकर वहां रख दीजिए। जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय पर 15 अगस्त के कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया गया था और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सोनिया के इशारे को वंदे मातरम रोकने की कोशिश बताना गलत है। कांग्रेस ने वंदे मातरम के इतिहास का भी जिक्र किया जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। बैठक में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और सी राजगोपालाचारी जैसे नेता मौजूद थे। रमेश के मुताबिक, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तय किया गया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम की शुरुआती पंक्तियां गाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि तब से कांग्रेस के अधिवेशनों और कार्यक्रमों में इन्हीं पंक्तियों का इस्तेमाल होता रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि 15 अगस्त को इंदिरा भवन में वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया गया था। पूरे और छोटे वंदे मातरम को लेकर क्या विवाद है? वंदे मातरम के पूरे और संक्षिप्त संस्करण को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। 1937 में कांग्रेस ने इसके शुरुआती दो अंतरों को अपनाया था। बाद के अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े संदर्भ हैं, जिनको लेकर उस समय कुछ आपत्तियां उठी थीं। इसी वजह से सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों में आमतौर पर वंदे मातरम की शुरुआती पंक्तियों का इस्तेमाल होता रहा है। अब 15 अगस्त के कांग्रेस कार्यक्रम में पूरा संस्करण गाए जाने के बाद BJP ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया। वंदे मातरम को लेकर नया कानून क्या कहता है? संसद के इस मानसून सत्र में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026′ पास किया। इसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर वैधानिक संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। नए कानून में राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय बनाया गया है। इसी नए कानूनी प्रावधान के बीच BJP ने कांग्रेस के कार्यक्रम में हुई कथित घटना को मुद्दा बनाया है।

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