एमपी के छतरपुर जिले के सीमा से लगे यूपी बार्डर में बसा श्रीनगर गांव(महोबा जिला) जहां आज भी आजादी के पहले का विद्यालय मौजूद है. इस विद्यालय का इतिहास 120 साल पुराना बताया जाता है. इस विद्यालय का इतिहास बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल के परिवार से माना जाता है.
120 साल पुराना स्कूल
प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर किला में पिछले 15 सालों से प्रिंसिपल के तौर पर सेवाएं दे रहीं प्रियंका तिवारी बताती हैं कि यह स्कूल 120 साल पुराना है. यहां आज भी बच्चे पढ़ते हैं. यह श्रीनगर किला की पहाड़ी पर बना है. इसलिए स्कूल के नाम के साथ में श्रीनगर किला भी जुड़ा है.
राजा मोहन सिंह ने बनवाया स्कूल
प्रियंका बताती हैं कि इस प्राथमिक विद्यालय की स्थापना साल 1901 में हुई थी. इस स्कूल का निर्माण बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल(जिन्होंने मप्र की छतरपुर नगरी बसाई थी) के 8वें दत्तक पुत्र बुंदेला राजा मोहन सिंह ने कराया था. साथ ही श्री नगर किला का निर्माण भी राजा मोहन सिंह ने ही कराया था. किला के पहाड़ के ऊपर ही ये विद्यालय चलता था. इसलिए आज भी ये विद्यालय अपने अस्तित्व में है. भारत की आजादी के बाद राज्यों का गठन हुआ. सीमाएं खिंच गईं. इसलिए ये स्कूल आजादी के बाद से महोबा जिला में आने लगा. हालांकि, कुछ कमी दूरी पर मध्यप्रदेश का छतरपुर जिले की सीमा लग जाती है.
स्कूल बिल्डिंग आज भी जस की तस
प्रियंका बताती हैं कि 120 साल पुराने स्कूल में आज भी राजा मोहन सिंह की बनवाई इमारत मौजूद है. आज भी 100 साल पुराने दरवाजे स्कूल में लगे हैं. इस बिल्डिंग में किसी भी तरह की शिकायत नहीं मिली है. हालांकि, कुछ साल पहले अलग से नए कमरे भी बनवाए गए हैं. जहां बच्चों की क्लास भी लगती हैं.
स्कूल परिसर की बदली तस्वीर
प्रियंका बताती हैं कि जब वह इस स्कूल में प्रिंसिपल के तौर पर पदस्थ हुई थीं तो यहां स्कूल की हालत काफी खराब थी. यहां पेड़ भी नहीं थे. स्कूल पहाड़ी के ऊपर बना हुआ है तो अवारा तत्व भी आकर गंदगी फैलाते थे. इसके बाद हमनें पहाड़ के ऊपर भी बच्चों के खेलने का गार्डन बनाया और स्कूल के अंदर पौधे भी लगवाए. आज इस स्कूल में नियमित रूप से बच्चे पढ़ने आते हैं और कक्षाएं भी नियमित चलती हैं.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



