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बीते कुछ सालों में सोलर पैनल का चलन बढ़ा है. सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है. इसे लगवाने के लिए सब्सिडी देती है. इसे लगवाने में शुरुआत में लाखों का खर्चा आता है, जिसकी वजह से लोग लगवाने से बचते हैं. या फिर कई लोगों को भ्रम है कि लाखों खर्च करने के बाद भी इससे कुछ फायदा नहीं होता है. यहां हम आपको सोलर पैनल की लाइफ के बारे में बता रहे हैं. इसकी लाइफ कितनी है? यह कितने सालों में खराब होता है? इसकी बिजली क्षमता बढ़ते सालों के साथ कम होती है.
बिजली के बढ़ते बिल और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच भारत में सोलर पैनल तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. घरों की छतों से लेकर बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री और पार्कों तक सोलर एनर्जी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. हालांकि, कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या सोलर पैनल हमेशा एक जैसी बिजली बनाते हैं? इनकी लाइफ कितनी होती है और समय के साथ इनकी क्षमता क्यों कम हो जाती है? अगर आप भी सोलर सिस्टम लगाने की योजना बना रहे हैं, तो इन सवालों के जवाब जानना बेहद जरूरी है. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
सोलर पैनल की कितनी होती है लाइफ?: ज्यादातर मॉडर्न सोलर पैनलों की औसत उम्र 25 से 30 साल मानी जाती है. इसका मतलब यह नहीं है कि 30 साल बाद पैनल अचानक काम करना बंद कर देंगे. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
सोलर पैनल 30 साल के बाद भी वे बिजली बनाते रहते हैं, लेकिन उनकी बिजली बनाने की क्षमता पहले की तुलना में कम हो जाती है. कई मामलों में अच्छी गुणवत्ता वाले सोलर पैनल 35 से 40 साल तक भी यूज में रहते हैं. हालांकि, उनकी दक्षता (Efficiency) धीरे-धीरे घटती जाती है. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
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हर साल कितनी घटती है क्षमताः सोलर पैनल समय के साथ डिग्रेडेशन (Degradation) का शिकार होते हैं. यानी हर साल उनकी बिजली उत्पादन क्षमता थोड़ी कम हो जाती है. अच्छी गुणवत्ता वाले मोनोक्रिस्टलाइन (Monocrystalline) पैनलों में यह गिरावट आमतौर पर 0.3% से 0.5% हर साल होती है. सामान्य गुणवत्ता वाले पैनलों में यह 0.5% से 0.8% प्रति वर्ष तक हो सकती है. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
उदाहरण के लिए, यदि आपने 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया है और उसमें 0.5% सालाना गिरावट होती है, तो 25 वर्षों के बाद उसकी क्षमता लगभग 87% से 88% तक रह सकती है. यानी वह पहले की तुलना में कम बिजली बनाएगा, लेकिन पूरी तरह बेकार नहीं होगा. (फाइल फोटो)
क्षमता कम क्यों होती हैः सोलर पैनल लगातार धूप, गर्मी, बारिश, धूल और मौसम के उतार-चढ़ाव का सामना करते हैं. यही कारण है कि समय के साथ उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
क्षमता कम होने के मुख्य कारण: तेज धूप और पराबैंगनी (UltaViolet) किरणों का लंबे समय तक असर, अत्यधिक गर्मी और तापमान में लगातार बदलाव नमी और बारिश से सामग्री का धीरे-धीरे कमजोर होना, धूल, प्रदूषण और पक्षियों की गंदगी का जमाव, माइक्रो-क्रैक (सूक्ष्म दरारें) और प्राकृतिक घिसावट और निम्न गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
सोलर सिस्टम में केवल पैनल ही नहीं होते, बल्कि इन्वर्टर और बैटरी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सोलर इन्वर्टर की एवरेज लाइफ लगभग 10 से 15 वर्ष होती है. लिथियम-आयन बैटरी आमतौर पर 10 से 15 वर्ष तक चलती है. लेड-एसिड बैटरी की लाइफ लगभग 5 से 7 वर्ष होती है. यानी पूरे सोलर सिस्टम के दौरान इन्वर्टर और बैटरी को एक या अधिक बार बदलने की जरूरत पड़ सकती है. (फोटो साभारः फेसबुक @SeciLimited)
सोलर पैनल की लाइफ कैसे बढ़ाई जा सकती है?: समय-समय पर पैनलों की सफाई करें. पेड़ों या इमारतों की छाया से बचाएं, अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित (Certified) पैनल चुनें, समय-समय पर वायरिंग और इन्वर्टर की जांच कराएं, धूल और गंदगी जमा होने पर तुरंत साफ करें. (फाइल फोटो)
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