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होमखेलक्रिकेटघाटी के सन्नाटे को चीरती सनसनी के लिए नया नहीं है श्रीलंका, नाप चुके है रन-अप

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घरेलू क्रिकेट के रिकॉर्ड दावेदारी के साथ ऐसा बोलते हैं कि चयनकर्ता उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते . आकिब नबी ने  60 विकेटों के साथ रणजी ट्रॉफ़ी 2025-26 सीज़न में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ के रूप में अपना सफ़र समाप्त किया, और पिछले दो घरेलू अभियानों में कुल 104 विकेट चटकाने का शानदार सिलसिला क़ायम रखा.

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टीम इंडिया में शामिल किए गए आकिब नबी के लिए नया नहीं है श्रीलंका

नई दिल्ली. गोलियों के शोर और बमों के धमाके से घिरे कश्मीर से कोई ऐसा चेहरा निकल कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाता है तो उसकी काबलियत को चार चांद तो लग ही जाते है उसकी चर्चा दू-दूर तक होती है. ये कहानी है घाटी से आए उस गेंदबाज की जिसने एक-एक विकेट के साथ अपनी गेंदबाजी का ऐसा शोर मचाया जिसे नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन हो जाए. औक़िब नबी की कहानी बिल्कुल ऐसी ही है. जम्मू-कश्मीर के इस तेज़ गेंदबाज़ को श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए जसप्रीत बुमराह की जगह टीम में शामिल किया गया है, और घरेलू क्रिकेट पर नज़र रखने वाले इस बुलावा का लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे.

घरेलू क्रिकेट के रिकॉर्ड दावेदारी के साथ ऐसा बोलते हैं कि चयनकर्ता उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते . आकिब नबी ने  60 विकेटों के साथ रणजी ट्रॉफ़ी 2025-26 सीज़न में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ के रूप में अपना सफ़र समाप्त किया, और पिछले दो घरेलू अभियानों में कुल 104 विकेट चटकाने का शानदार सिलसिला क़ायम रखा. गेंदबाज़ी के इस शानदार प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक रेड-बॉल सफ़र में अहम भूमिका निभाई और टीम को उसका पहला रणजी ट्रॉफ़ी ख़िताब जिताने में मदद की.

श्रीलंका नबी के लिए नया नहीं है

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए उनकी तैयारी को भारत ‘ए’ के हालिया श्रीलंका दौरे के रेड-बॉल मैच के दौरान और बल मिला. अनौपचारिक टेस्ट मैचों में उतरते हुए, उन्होंने छह विकेट लिए, उपमहाद्वीप की उन परिस्थितियों से अच्छी तरह वाक़िफ़ हुए जिन्होंने उन्हें चयनकर्ताओं की नज़रों में बनाए रखा. नबी उन गेंदबाजों की श्रेणी में रखे जा सकेत है जिनको ना तो पिच की मदद की दरकार होती है और ना ही परिस्थिति की. उनको अपने हुनर पर भरोसा है और ये भरोसा फैंस और टीम मैनेजमेंट भी कर सकता है. भारतीय पिचों पर गेंद को दोनो तरफ मूव कराने और पुरानी गेंद को रिवर्स कराने की काबलियत उनको श्रीलंका कि स्पिन फ्रेंडली पिचों पर भी कारगर बनाती है.

बुमराह की जगह भरना आसान नहीं

बुमराह की अनुपस्थिति सिर्फ मौका तैयार करती है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में नबी का शानदार प्रदर्शन ही असली कहानी है. कार्डिफ में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे के दौरान फ़ील्डिंग करते हुए इस सीनियर तेज़ गेंदबाज़ के बाएं घुटने में चोट लग गई थी, जिसके कारण वह चयन से बाहर हो गए हैं. अजीत आगरकर की अध्यक्षता वाली पुरुष चयन समिति और बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की स्पोर्ट्स साइंस टीम ने आगे के व्यस्त अंतर्राष्ट्रीय कैलेंडर को देखते हुए उनकी वापसी में जल्दबाज़ी न करने का फ़ैसला किया. नबी के लिए, किसी और की बदक़िस्मत ने एक अभूतपूर्व अवसर का द्वार खोल दिया है. जब टेस्ट सीरीज़ की शुरुआत होगी, तो घरेलू क्रिकेट की कड़ी मेहनत पर बनी एक यात्रा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुंच जाएगी.

टेस्ट टीम में नबी के  बुलावे का ऐतिहासिक महत्व भी बहुत है. परवेज़ रसूल और उमरान मलिक के बाद नबी सीनियर भारतीय टीम में चुने जाने वाले जम्मू-कश्मीर के केवल तीसरे क्रिकेटर बन गए हैं. हालांकि, अपने उन पूर्ववर्तियों के विपरीत जिन्होंने मुख्य रूप से व्हाइट-बॉल फ़ॉर्मेट के ज़रिए अपनी पहचान बनाई थी, नबी का रास्ता पूरी तरह से रेड-बॉल क्रिकेट की कड़ी मेहनत से तैयार हुआ है, जो एक पारंपरिक तेज़ गेंदबाज़ के लिए एक सही उपलब्धि है.

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Rajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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