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Khadi Kanwar Yatra Meerut: मेरठ के NH-58 पर कांवड़ यात्रा का अनोखा रंग देखने को मिल रहा है. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले शिवभक्त गंगोत्री धाम से 800 किलोमीटर दूर अपने गांव के लिए कठिन ‘खड़ी कांवड़’ लेकर पैदल जा रहे हैं. लोकल-18 की खास बातचीत में कांवड़ियों ने बताया कि खड़ी कांवड़ को पूरी यात्रा में कहीं भी नीचे नहीं रखा जाता है, इसे लगातार कंधों पर संभालकर ही गंतव्य तक पहुंचाया जाता है. जानिए शिवभक्तों की इस कठिन यात्रा और अटूट श्रद्धा की पूरी कहानी…

Khadi Kanwar Yatra Meerut: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों कांवड़ यात्रा का अलौकिक और अनूठा उत्साह छाया हुआ है. हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते शिवभक्तों की भक्ति देखते ही बन रही है. इसी कड़ी में मेरठ के नेशनल हाईवे-58 पर मध्य प्रदेश के मुरैना से आए शिवभक्तों की एक ऐसी टोली देखने को मिली, जो गंगोत्री धाम से लगभग 800 किलोमीटर दूर अपने गांव के लिए कठिन ‘खड़ी कांवड़’ लेकर पैदल बढ़ रही है. लोकल-18 की टीम ने जब इन अनूठे कांवड़ियों से बात की, तो भक्ति, नियम और समर्पण की एक अलग ही दास्तान सामने आई.

गंगोत्री से मुरैना: 800 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा
भोले भक्त वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने गंगोत्री धाम से पवित्र जल उठाया है. अब वह मध्य प्रदेश के जिला मुरैना स्थित बुढ़वाली गांव जाएंगे. उन्होंने बताया कि अगर संपूर्ण यात्रा के कुल किलोमीटर की बात की जाए, तो यह लगभग 800 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा रहेगी. उन्होंने बताया कि हर साल उनकी टीम इसी तरह से गंगोत्री से मध्य प्रदेश तक ‘खड़ी कांवड़’ लेकर आती है. खास बात यह है कि हर साल उनकी इस टोली में नए सदस्य जुड़ते चले जाते हैं, जो निरंतर इस पावन परंपरा को निभाते आ रहे हैं.

बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान राहें
वीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी इस टोली में आपको युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक देखने को मिलेंगे, जो भोले बाबा की भक्ति और आराधना करते हुए ‘बम-बम भोले’ के जयकारों के साथ इसी तरह पैदल चलते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी भोले बाबा से अपने लिए कुछ नहीं मांगा, क्योंकि भोले बाबा बिन मांगे ही सब कुछ दे देते हैं. यही वजह है कि वे निरंतर इसी तरह से भोले की निस्वार्थ भक्ति में लीन रहते हैं.

क्या होती है खड़ी कांवड़? पहलवान सिंह ने बताया नियम
कांवड़िए पहलवान सिंह ने बताया कि उनकी टीम के सदस्य हर साल गंगोत्री से मध्य प्रदेश तक खड़ी कांवड़ लेकर आते हैं. उन्होंने नियम समझाते हुए बताया कि ‘खड़ी कांवड़’ को यात्रा के दौरान रास्ते में कहीं भी नीचे नहीं रखा जाता है. इसे सिर्फ अपने कंधों पर ही निरंतर संभाले रखना होता है और आगे बढ़ते रहना होता है. ऐसे में उनकी टोली के अलग-अलग सदस्य बारी-बारी से इस नियम और परंपरा का पालन करते हैं. आपको बता दें कि इस समय मेरठ के NH-58 मार्ग पर कांवड़ यात्रा के ऐसे ही कई अनूठे और मनमोहक रंग देखने को मिल रहे हैं.

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Rahul Goel

Rahul Goyal is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations …

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