Image Slider

होमफोटोधर्मसावन में भोलेनाथ को चढ़ाएं ये 5 पवित्र चीजें, खुल सकते हैं तरक्की के रास्ते

Last Updated:

Sawan Somwar 2026: सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल (या पंचामृत) से शिवलिंग का अभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. हालांकि, धन, रोग या शत्रुओं से जुड़े लाभ धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आने लगती है. कोई भगवान शिव का जलाभिषेक करता है तो कोई दूध, पंचामृत और बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ की पूजा करता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव को श्रद्धा से कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है.

अगर आप भी सावन में महादेव की विशेष पूजा करना चाहते हैं तो अलग-अलग मनोकामनाओं के अनुसार अभिषेक की कुछ विधियां बताई गई हैं. कर्मकांड ज्योतिषी पं. मनीष उपाध्याय के अनुसार, पंचामृत से लेकर कुशोदक तक का शिव पूजा में विशेष महत्व माना गया है.

सावन में भगवान शिव को पंचामृत अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और बूरा या शक्कर से तैयार किया जाता है. मान्यता है कि पंचामृत से महादेव का अभिषेक करने से सुख-समृद्धि आती है और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अभिषेक के बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल जरूर चढ़ाना चाहिए.

Add News18 as
Preferred Source on Google

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सरसों के तेल का प्रयोग कुछ विशेष शिव पूजा और अनुष्ठानों में किया जाता है. पं. मनीष उपाध्याय के मुताबिक, शत्रु बाधा से मुक्ति की कामना रखने वाले श्रद्धालु सावन में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. हालांकि ऐसे उपाय योग्य पंडित की सलाह से ही करना उचित माना जाता है.

भगवान शिव को शहद अर्पित करना भी शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि शहद से अभिषेक करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां कम होती हैं. सावन में श्रद्धालु शुद्ध शहद से शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान शिव से धन-धान्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं.

सावन में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा काफी पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं में दूध को सात्विकता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है. संतान सुख की कामना रखने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का दूध से अभिषेक कर प्रार्थना करते हैं. इसके बाद जल से शिवलिंग का अभिषेक करना भी पूजा का हिस्सा माना जाता है.

शिव पूजा में कई प्राकृतिक और औषधीय तत्वों का भी उल्लेख मिलता है. पं. मनीष उपाध्याय बताते हैं कि कुशा से तैयार किया गया जल यानी कुशोदक भी भगवान शिव को अर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कुशोदक से भगवान शिव का अभिषेक करने से रोग-दोष से मुक्ति की कामना की जाती है.

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||