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Jaunpur famous perfume: मोहम्मद मुस्तफा जकरिया ने बताया कि जौनपुर का चमेली इत्र पूरी तरह प्राकृतिक होता है. इसे चमेली के ताजे फूलों और बेस ऑयल की मदद से तैयार किया जाता है. इसकी खुशबू इतनी खास होती है कि कपड़ों पर लगाने के बाद दो से चार दिनों तक बनी रहती है. यही वजह है कि लोग इसे काफी पसंद करते हैं. उन्होंने बताया कि इस इत्र को तैयार करने में लगभग 15 से 20 दिन का समय लगता है. पहले चमेली के ताजे फूलों को विशेष प्रक्रिया के तहत बेस ऑयल में रखा जाता है. इसके बाद इसे प्राकृतिक तरीके से धूप में तैयार किया जाता है.

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जौनपुर: इत्र की बात हो और जौनपुर के चमेली इत्र का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है. अपनी प्राकृतिक खुशबू और लंबे समय तक टिकने वाली महक के कारण जौनपुर का चमेली इत्र आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. सात पीढ़ियों से इस पारंपरिक कारोबार को आगे बढ़ा रहे इत्र कारोबारी मोहम्मद मुस्तफा जकरिया आज भी उसी पारंपरिक तरीके से इत्र तैयार कर रहे हैं, जिससे वर्षों पहले उनके पूर्वज किया करते थे.

मोहम्मद मुस्तफा जकरिया ने बताया कि जौनपुर का चमेली इत्र पूरी तरह प्राकृतिक होता है. इसे चमेली के ताजे फूलों और बेस ऑयल की मदद से तैयार किया जाता है. इसकी खुशबू इतनी खास होती है कि कपड़ों पर लगाने के बाद दो से चार दिनों तक बनी रहती है. यही वजह है कि लोग इसे काफी पसंद करते हैं.

15 दिन में तैयार होता है इत्र

उन्होंने बताया कि इस इत्र को तैयार करने में लगभग 15 से 20 दिन का समय लगता है. पहले चमेली के ताजे फूलों को विशेष प्रक्रिया के तहत बेस ऑयल में रखा जाता है. इसके बाद इसे प्राकृतिक तरीके से धूप में तैयार किया जाता है. पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शुद्ध चमेली इत्र बाजार में बिक्री के लिए आता है. जौनपुर के इस पारंपरिक इत्र की मांग अब केवल जिले या प्रदेश तक सीमित नहीं है. मुंबई, हैदराबाद, गुजरात के राजकोट समेत देश के कई शहरों में इसकी सप्लाई की जाती है. हाल ही में प्रदेश की राज्यपाल के लिए भी यहां से इत्र भेजा गया. इसके अलावा पूर्वांचल विश्वविद्यालय और कई सरकारी कार्यक्रमों में भी इस इत्र की विशेष मांग रहती है.

चमेली के फूल से होता है तैयार

हालांकि, इस पारंपरिक उद्योग के सामने कई चुनौतियां भी हैं. मुस्तफा जकरिया बताते हैं कि पहले बड़ी मात्रा में चमेली के फूल उपलब्ध हो जाते थे, लेकिन अब फूलों की खेती कम होने से कच्चे माल की कमी हो रही है. इससे उत्पादन भी घटा है और लागत बढ़ने के कारण इत्र के दाम भी पहले की तुलना में अधिक हो गए हैं. उन्होंने बताया कि आज की नई पीढ़ी इंटरनेट और अन्य माध्यमों से जौनपुर के चमेली इत्र के बारे में जानकारी हासिल कर रही है और इसकी ओर आकर्षित हो रही है. उनका मानना है कि यदि सरकार इस पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा दे और देश-विदेश में इसका प्रचार-प्रसार करे, तो जौनपुर का चमेली इत्र वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकता है.

सदियों पुरानी परंपरा और प्राकृतिक खुशबू से तैयार होने वाला जौनपुर का चमेली इत्र आज भी अपनी गुणवत्ता के दम पर लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए है. यह सिर्फ एक इत्र नहीं, बल्कि जौनपुर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हुनर की महक है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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