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Shadow Posting in Government Jobs: सरकारी नौकरी में ‘शैडो पोस्टिंग’ का क्या मतलब होता है? कैसे किसी नए या ट्रांसफर होकर आए अधिकारी को बिना ऑफिशियल चार्ज दिए पुराने अफसर के साथ काम सीखने के लिए बैठाया जाता है? जानिए इस अनोखी प्रशासनिक प्रक्रिया के फायदे और इसके काम करने का तरीका.

सरकारी नौकरी में शैडो पोस्टिंग क्या होती है? जानिए सीनियर से काम सीखने का अनोखZoom

Shadow Posting in Government Jobs: शैडो पोस्टिंग में नए अधिकारी को ऑफिस का काम-काज सिखाया जाता है

नई दिल्ली (Shadow Posting in Government Jobs). जब भी किसी सरकारी विभाग में कोई नया अधिकारी आता है या किसी बड़े पद पर ट्रांसफर होता है तो वह तुरंत फैसला लेना शुरू नहीं करता. कुछ दिनों तक वह विभाग के पुराने अफसर के साथ बैठता है और काम को सिर्फ ध्यान से देखता है. प्रशासनिक भाषा में इसी व्यवस्था को ‘शैडो पोस्टिंग’ कहा जाता है. इस अस्थायी व्यवस्था में नया अफसर किसी पद पर ऑफिशियल चार्ज लेने से पहले ‘छाया’ की तरह पुराने अफसर के साथ रहकर काम सीखता है.

शैडो पोस्टिंग का मुख्य मकसद सरकारी कामकाज की कंसिस्टेंसी को बनाए रखना होता है.. यानी काम रुके नहीं. किसी भी बड़े या संवेदनशील पद पर बैठे अधिकारी के अचानक हट जाने से जनता के काम अटक सकते हैं. इसलिए नए अधिकारी को सिस्टम, फाइलों की स्थिति और लोकल बारीकियों को समझाने के लिए कुछ दिनों या हफ्तों के लिए शैडो रोल में रखा जाता है. समझिए, सरकारी नौकरी में यह व्यवस्था कैसे काम करती है और इसके क्या-क्या फायदे हैं.

शैडो पोस्टिंग का क्या मतलब है?

‘शैडो’ का अर्थ होता है परछाई. शैडो पोस्टिंग के दौरान नया कर्मचारी या अधिकारी पुराने अनुभवी अधिकारी के साथ परछाई की तरह रहता है.

  • जिम्मेदारी: इस दौरान नए अधिकारी के पास हस्ताक्षर करने या फैसले लेने का कानूनी अधिकार नहीं होता. सारे प्रशासनिक फैसले पुराना अधिकारी ही लेता है.
  • भूमिका: नया अधिकारी बैठकों में शामिल होता है, फाइल्स का मूवमेंट देखता है और रोजमर्रा की चुनौतियों को समझता है.

शैडो पोस्टिंग की व्यवस्था कब और क्यों लागू की जाती है?

शैडो पोस्टिंग हर छोटे पद के लिए नहीं होती. यह आमतौर पर उच्च प्रशासनिक पदों, संवेदनशील विभागों या तकनीकी भूमिकाओं में लागू की जाती है.

  • रिटायरमेंट के समय: जब कोई सीनियर अधिकारी रिटायर होने वाला होता है तो उसकी जगह लेने वाले नए अफसर को 1-2 महीने पहले शैडो पोस्टिंग दे दी जाती है.
  • बड़े ट्रांसफर के दौरान: जिलाधिकारी (DM), पुलिस कप्तान (SP) या विभाग के सचिव स्तर के तबादलों में काम के स्मूथ ट्रांसफर (Handover) के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती है.

शैडो पोस्टिंग के फायदे क्या हैं?

सरकारी नौकरी में शैडो पोस्टिंग के कई बड़े फायदे हैं. इनकी डिटेल आप नीचे पढ़ सकते हैं:

  • काम में रुकावट नहीं आती: पुराना अफसर जाने से पहले सारे पेंडिंग काम और जरूरी प्रोजेक्ट्स की जानकारी नए अफसर को दे देता है. इससे सरकारी काम की स्पीड धीमी नहीं पड़ती.
  • गलतियों की गुंजाइश खत्म: नया अफसर बिना किसी दबाव के प्रैक्टिकल बातें सीख लेता है. इससे चार्ज संभालते ही गलत फैसले लेने का रिस्क कम हो जाता है.
  • टीम से परिचय: शैडो पीरियड के दौरान नया अफसर विभाग के बाकी कर्मचारियों और निचले स्टाफ के साथ तालमेल (Rapport) बना लेता है.

शैडो पोस्टिंग और रेगुलर पोस्टिंग में क्या अंतर है?

रेगुलर पोस्टिंग में अधिकारी के पास पद की पूरी पावर, सील और जिम्मेदारी होती है. वह जो भी फैसला लेता है, उसके लिए सीधे तौर पर जवाबदेह होता है. इसके उलट, शैडो पोस्टिंग एक तरह का ‘ऑन-द-जॉब ऑब्जर्वेशन’ (On-the-job observation) पीरियड है. इसमें सैलरी और भत्ते तो पद के अनुसार ही मिलते हैं, लेकिन प्रशासनिक शक्तियां चार्ज लेने के बाद ही मिलती हैं.

शैडो पोस्टिंग कब और कैसे खत्म होती है?

जैसे ही तय समय (कुछ दिन या महीने) पूरा होता है या पुराना अधिकारी पदमुक्त (Relieve) होता है, नया अधिकारी आधिकारिक तौर पर ‘चार्ज रिपोर्ट’ पर साइन करता है. इसके साथ ही शैडो पोस्टिंग खत्म हो जाती है और अधिकारी पूर्ण रूप से अपनी रेगुलर पोस्टिंग का प्रभार संभाल लेता है. इसके बाद जो भी फैसले लिए जाते हैं, उसके लिए वही जिम्मेदार होता है.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…

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