Chandauli News: विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चंदौली में किसानों का धरना 13वें दिन भी जारी रहा. किसानों ने एडीएम को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देकर यूपीडा और जिला प्रशासन की मौजूदगी में वार्ता कराने, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की.
किसानों का कहना है कि बिना सहमति और पर्याप्त संवाद के उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए हर स्तर तक संघर्ष करेंगे.
संवाद ही है समाधान का रास्ता
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक और भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता मणिदेव चतुर्वेदी ने लोकल 18 से बताया कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से पहले से मौजूद राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच कुछ ही दूरी पर एक और एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है, उससे कई गंभीर समस्याएं पैदा होंगी. उन्होंने कहा कि लगातार कई ऊंचे हाईवे बनने से बरसात का पानी निकलने का रास्ता प्रभावित होगा, जिससे जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है.
चंदौली जैसे कृषि प्रधान जिले में उपजाऊ जमीन खत्म होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. मणिदेव चतुर्वेदी ने बताया कि किसानों ने मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर मांग की है कि सबसे पहले प्रशासन, यूपीडा और किसान संगठनों के बीच वार्ता कराई जाए. उन्होंने कहा कि यदि सरकार बातचीत नहीं करती है, तो किसान पंचायत आयोजित कर आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे.
उचित मुआवजा और पुनर्वास है जरूरी
धरने में शामिल किसान विजय शंकर सिंह ने लोकल 18 से कहा कि सरकार सड़क और एक्सप्रेस-वे बनाकर विकास करे, इससे किसानों को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन जिन किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा और बेहतर पुनर्वास मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि कृषि ही अधिकांश किसानों की आजीविका का एकमात्र साधन है. यदि उनकी जमीन चली जाएगी, तो उनके परिवार और बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा. इसलिए सरकार को किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए.
जल निकासी की भी है बड़ी समस्या
किसान विनोद कुमार शर्मा ने लोकल 18 से कहा कि चंदौली क्षेत्र में पहले से कई चौड़ी सड़कें और हाईवे मौजूद हैं, ऐसे में एक और बड़े एक्सप्रेस-वे के निर्माण से प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित होगी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नालों और नदियों का बहाव पहले ही सीमित हो चुका है, तो बारिश का अतिरिक्त पानी आखिर कहां जाएगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाए और किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए.
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
धरने पर बैठे किसानों ने लोकल 18 से कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. किसानों ने कहा कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन अपनी उपजाऊ जमीन और भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे. यदि सरकार जल्द बातचीत नहीं करती है, तो आंदोलन को और तेज करते हुए बड़े स्तर पर किसान पंचायत आयोजित की जाएगी.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
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