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Vibrant Villages Program:भारत ने चीन की सीमा से लगे गांवों को मजबूत बनाने के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम शुरू किया है. इस प्रोग्राम के तहत अरुणाचल, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल और सिक्किम के सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, इंटरनेट, रोजगार और पर्यटन को नया स्वरूप दिया जा रहा है. माना जा रहा है कि यह प्रोग्राम एलएसी के पास चीन द्वारा बसाए गए गांवों का रणनीतिक जवाब है. जानिए किबिथू गांव से क्यों हुई शुरुआत, क्यों भड़का चीन और कैसे यह प्रोग्राम ने सीमा सुरक्षा के साथ स्थानीय विकास को नई ताकत दी.
अरुणाचल प्रदेश के किबिथू गांव में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमा से सटे गांवों को विकसित कर भारत ने चीन की चाल पर पानी फेर दिया है.
Vibrant Villages Program: अपनी चाल पर पानी फिरने के बाद चीन इन दिनों बौखलाया हुआ है. चीन की इस बौखलाहट की वजह है भारत का ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ भारत के इस प्रोग्राम ने चीन में मंसूबों पर पानी फेरते हुए सीमा पर पूरा खेल बदल दिया है. दरअसल, भारत-चीन सीमा पर अब सिर्फ सैनिकों की तैनाती ही नहीं, बल्कि गांवों की मौजूदगी भी अब राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा हिस्सा बन चुकी है. पिछले कुछ वर्षों में चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तेजी से नए गांव बसाए हैं. एलएसी पर गांवों की बसावट की चीन की चाल के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं, अब भारत ने चीन की इस चाल का भी इसका जवाब देने के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ शुरू किया है. इस प्रोग्राम का मकसद सिर्फ सीमा पर बसे गांवों का आधारभूत ढ़ाचा बेहतर करना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों को आबाद रखते हुए सीमा सुरक्षा को पुख्ता करना भी है. यही वजह है कि इस प्रोग्राम के शुरू होने के बाद से चीन चिढ़ा हुआ है.
क्या है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम?
केंद्र सरकार ने सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ शुरू किया है. इस प्रोग्राम के तहत चीन सीमा से लगे गांवों में सड़क, बिजली, इंटरनेट, पर्यटन, रोजगार और दूसरी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इस प्रोग्राम में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के सीमावर्ती गांव शामिल किए गए हैं. सरकार के अनुसार कुल 2,967 गांवों को इस प्रोग्राम के दायरे में लाया गया है. पहले चरण में 662 गांवों को प्रोग्राम में शामिल किया गया है. इनमें सबसे ज्यादा 455 गांव अरुणाचल प्रदेश के हैं. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख के गांव भी इस प्रोग्राम में शामिल हैं.
क्यों पड़ी इस प्रोग्राम की जरूरत और क्या हुआ बदलाव?
- 3488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा में कई गांव ऐसे हैं, जहां से नौजवानों का तेजी से पलायन हो रहा था. ये नौजवान रोजगार और बेहतर जिंदगी की तलाश में शहरों की तरफ बढ़ रहे थे. ऐसे में, खाली होते गांवों के साथ सीमा पर आबादी कम होने लगी. यह पलायन सीमा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता था.
- सीमा पर रहने वाली आबादी सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होती है. यह आबादी भारतीय सेना के लिए ‘आंख और कान’ का काम करती है. साथ ही, बॉर्डर पर होने वाली गतिविधियों पर गांव वालों की नजर बनी रहती है. सीमा पर होने वाली कोई भी हलचल इन्हीं गांव वालों के जरिए भारतीय सेना तक पहुंचती है.
- अगर ये गांव पूरी तरह खाली हो जाएं तो सीमा पर भारत की मौजूदगी कमजोर पड़ सकती है. यही कारण है कि सरकार अब लोगों को गांवों में ही रोजगार और सुविधाएं देकर उन्हें वहीं बसाए रखना चाहती है. इस प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, इंटरनेट, पर्यटन, रोजगार सहित दूसरी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाईं जा रही हैं.
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत इन गांवों में बड़े बदलाव किए जा रहे हें. गांवों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. नए घरों और सरकारी इमारतों का निर्माण किया जा रहा है. इन सभी गांवों में सौर ऊर्जा से भी लैस किया जा रहा है. इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी बेहतर करने के साथ कॉमन सर्विस सेंटर बनाए जा रहे हैं.
- इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को नई पहचान देने की कोशिश की जा रही है. युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार की योजनाएं शुरू की गई हैं. कृषि, बागवानी, औषधीय पौधों और जड़ी-बूटी आधारित रोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
- केंद्र सरकार ने इस प्रोग्राम पर 2022-23 से 2025-26 के बीच करीब 4800 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इनमें से करीब 2,500 करोड़ रुपये सिर्फ सड़क निर्माण पर खर्च किए गए हैं.
किबिथू से क्यों हुई इस प्रोग्राम की शुरुआत?
इस प्रोग्राम की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के किबिथू गांव से की गई. गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया था. किबिथू एक ऐसा गांव है, जो भारत-चीन सीमा के बेहद करीब है. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी सेना ने सबसे पहले जिन इलाकों पर हमला किया था, उनमें किबिथू भी शामिल था. यह गांव अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ के एयर फील्ड में स्थित है. यहां से चीन का बॉर्डर करीब 15 किमी दूर है. वहीं, भारत-चीन-म्यांमार का ट्राई-जंक्शन भी इस गांव से ज्यादा दूर नहीं है. इसलिए किबिथू का विकास केवल स्थानीय लोगों के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है.
इस प्रोग्राम से क्यों बेचैन है चीन?
केंद्र सरकार के इस प्रोग्राम से चीन बौखलाया हुआ है. उसकी बेचैनी का आलम यह है कि गृह मंत्री अमित शाह के किबिथू दौरे पर चीन बुरी तरह से भड़क गया था. चीन को गलतफहमी है कि यह इलाका उसके हिस्से में आता है. यही वजह है कि इस दौरे को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह दौरा उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताया था है. आपको बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ या ‘दक्षिणी तिब्बत’ कहता है और इस इलाके पर अपना दावा करता है. हालांकि, भारत में हमेशा से चीन को साफ कर रखा है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा है. भारत का साफ कहना है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.
चीन सीमा पर चल रहा था कौन सी चाल?
2017 के बाद से चीन ने एलएसी पर अपनी साजिश को अंजाम देना शुरू कर दिया था. रिपोर्टों के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच उसने सीमा से लगे इलाकों में करीब 500 गांव बसाए. इन गांवों में चीन दूसरे हिस्सों से लोगों को लाकर बसाया गया. साथ ही कई जगहों पर लोगों को हथियार चलाने और आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग भी दी गई. माना जाता है कि इन गांवों का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर चीन की सेना के सैन्य सहायता और डिफेंस पोस्ट के रूप में भी कर सकती है. सितंबर 2021 में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की एक रिपोर्ट में भी यह दावा किया गया था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले से सटे क्षेत्र में एक नया गांव बसाया है. रिपोर्ट में वहां मिलिट्री पोस्ट को स्टैबलिश करने की बात भी कही गई थी.
चीन की चाल पर क्या है भारत का जवाब?
चीन की इस रणनीति को देखते हुए भारत ने भी सीमा से लगे अपने गांवों को मजबूत और आबाद करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाए हैं. इसी सोच के तहत ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ शुरू किया गया है. इस प्रोग्राम का सीधा मकसद सीमावर्ती गांवों में आबादी रखना है. इसके लिए सभी सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं को बेहतर करने के साथ सभी सहूलियतें उपलब्ध कराईं जा रही हैं. इन गांवों में बसाहट बढ़ने से भारतीय सेना को भी सीमा की निगरानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट में मदद मिल रही है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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