धर्म नगरी चित्रकूट को प्रभु श्रीराम की तपोस्थली के रूप में पूरे देश में विशेष पहचान प्राप्त है.मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान अपने जीवन का एक लंबा समय चित्रकूट में बिताया था.यही कारण है कि सालभर देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचते हैं.यहां आने वाले भक्त कामदगिरि की परिक्रमा करते हैं, रामघाट में मां मंदाकिनी के पावन जल में स्नान करते हैं.
धर्म नगरी चित्रकूट को प्रभु श्रीराम की तपोस्थली के रूप में पूरे देश में विशेष पहचान प्राप्त है.मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान अपने जीवन का एक लंबा समय चित्रकूट में बिताया था.यही कारण है कि सालभर देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचते हैं.यहां आने वाले भक्त कामदगिरि की परिक्रमा करते हैं, रामघाट में मां मंदाकिनी के पावन जल में स्नान करते हैं.
लेकिन कई भक्तों के मन में चित्रकूट आने के बाद यह सवाल उठता है कि आखिर चित्रकूट में चंदन को ही प्रसाद के रूप में इतना महत्व क्यों दिया जाता है.इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है.इसके कारण भक्त यहां से चंदन का प्रसाद ले जाते है.
चित्रकूट के रामघाट पर मां मंदाकिनी में स्नान करने के बाद श्रद्धालु सबसे पहले चंदन का तिलक लगवाते हैं.इसके बाद अधिकांश भक्त वहीं से चंदन खरीदकर अपने घर ले जाते हैं, माना जाता है कि यह केवल एक सुगंधित चंदन नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम और गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ा पवित्र प्रसाद है.
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धार्मिक मान्यता के अनुसार धर्म नगरी चित्रकूट के रामघाट पर ही गोस्वामी तुलसीदास को सोमवती अमावस्या के दिन प्रभु श्रीराम के दिव्य दर्शन हुए थे.इसी पावन स्थल पर उन्होंने भगवान श्रीराम का चंदन से तिलक भी किया था.इसी आस्था के साथ चित्रकूट का चंदन प्रसाद के रूप में बिकता है.
आज भी बड़ी संख्या में संख्या में भक्त चित्रकूट के रामघाट में मौजूद दुकानों से ही चंदन खरीदने हैं,और उसको भगवान प्रभु श्री राम और गोस्वामी तुलसीदास का प्रसाद मानकर माथे में तिलक करते हैं. और वही तिलक प्रसाद के रूप में अपने घर ले जाते है.
रामघाट पर चंदन बेचने वाले दुकानदार अनिल का कहना है कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु दर्शन के बाद चंदन अवश्य खरीदते हैं. कई भक्त इसे अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए भी प्रसाद के रूप में लेकर जाते हैं,उनका विश्वास है कि चित्रकूट का चंदन घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
जानकारी के लिए बता दे कि रामघाट में बिकने वाला चंदन 10 रूपये से लेकर 100 रुपए तक।बिकता है. और यह चित्रकूट की सभी दुकानों में मौजूद रहता है. दुकानदारों का मानना है कि एक दिन में लगभग एक दुकान से 200 से 300 चंदन आसानी से बिक जाते हैं. और भक्त इसको अपने से ही खरीद लेते हैं
अगर आप भी कभी धर्म नगरी चित्रकूट दर्शन के लिए आएं तो रामघाट पर मां मंदाकिनी में स्नान करने के बाद चंदन का तिलक अवश्य लगवाएं और प्रसाद स्वरूप चंदन अपने घर जरूर लेकर जाएं.क्योंकि चित्रकूट का चंदन ही भक्तों के लिए प्रमुख प्रसाद माना गया है.
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