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होमताजा खबरकृषिधान की पत्तियों का हरापन हो रहा खत्म? एक्सपर्ट से जानें पैदावार बढ़ाने के उपाय

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Paddy Farming Tips: धान की फसल में पत्तियों का हरापन कम होना और पीलापन बढ़ना किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. समय रहते इसका प्रबंधन न किया जाए तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की पत्तियों का पीला पड़ना अक्सर नाइट्रोजन, जिंक और फास्फोरस की कमी के कारण होता है. सही समय पर पोषक तत्वों की पूर्ति और खरपतवार नियंत्रण करके किसान अपनी फसल को नुकसान से बचा सकते हैं और बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं.

Paddy Farming Tips: धान की फसल इस समय खेतों में तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में कई किसानों के खेतों में पौधों की हरी पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगी हैं. शुरुआत में यह समस्या छोटी दिखाई देती है, लेकिन समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इसका सीधा असर धान के उत्पादन पर पड़ सकता है. पत्तियों का रंग बदलना कई बार पोषक तत्वों की कमी और खेत में बढ़ रही खरपतवार की वजह से भी होता है. ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करते रहना जरूरी है, ताकि समय रहते सही प्रबंधन किया जा सके.

धान की पत्तियों में पीलापन आने के कई कारण हो सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर खेत के आसपास या चारों तरफ खरपतवार ज्यादा है तो वहां से फसल में समस्या शुरू हो सकती है. शुरुआत में इसके लक्षण एक-दो पौधों में दिखाई देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत की फसल को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए किसान समय-समय पर खेत की साफ-सफाई पर भी ध्यान दें.

नीचे की पत्तियां पीली तो नाइट्रोजन की हो सकती है कमी
धान की फसल में अगर सबसे पहले नीचे वाली पत्तियों का रंग हरे से पीला होने लगे तो यह नाइट्रोजन की कमी का संकेत हो सकता है. वहीं अगर ऊपर की पत्तियां भी पीली दिखाई देने लगें तो पौधे में जिंक और फास्फोरस की कमी हो सकती है. इन कमियों को समय पर पूरा करना जरूरी होता है, क्योंकि पोषक तत्वों की कमी बढ़ने पर पौधों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

कमी के हिसाब से करें खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र तोमर ने बताया कि धान में पीलापन आने की समस्या को समझने के लिए किसान सबसे पहले अपने खेत और पौधों की अच्छी तरह जांच करें. अगर नीचे की पत्तियों में पीलापन है तो खेत में नाइट्रोजन की कमी हो सकती है. इसके लिए किसान एक एकड़ खेत में करीब 7 से 8 किलोग्राम नाइट्रोजन का प्रयोग कर सकते हैं.

उन्होंने बताया कि अगर ऊपर की पत्तियों में पीलापन दिखाई दे रहा है तो जिंक और फास्फोरस की कमी हो सकती है. जिंक की कमी पूरी करने के लिए 21 प्रतिशत जिंक का इस्तेमाल करीब 5 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से किया जा सकता है. वहीं फास्फोरस की कमी होने पर 0.5 प्रतिशत का स्प्रे करके इसकी पूर्ति की जा सकती है.

खरपतवार पर भी रखें नजर
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि धान के खेत के आसपास खरपतवार ज्यादा होने पर किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है. कई बार फसल में बीमारी की शुरुआत खेत के किनारे से होती है और धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाती है. इसलिए किसान समय-समय पर खरपतवार को हटाते रहें और फसल की निगरानी करते रहें. अगर किसान समय रहते पत्तियों के रंग में हो रहे बदलाव को पहचानकर सही प्रबंधन कर लें तो धान की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन भी लिया जा सकता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …

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