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नई दिल्ली. सुपरस्टार आमिर खान को बॉलीवुड का मिस्टर परफेक्टनिस्ट कहा जाता है. इसकी वजह है कि वह अपनी फिल्मों में हर बारीकी का ध्यान रखते हैं. लेकिन उनका यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. 1988 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से रातों-रात स्टार बनने के बाद आमिर की कई फिल्में फ्लॉप हुईं. वह घर लौटकर हर रात को रोते थे. हालांकि, 1990 में आई माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘दिल’ ने उनके करियर को नई जिंदगी दी.

लंदन फिल्म फेस्टिवल में आमिर खान ने अपने करियर के इस सबसे मुश्किल दौर को याद किया और बताया कि कैसे उन शुरुआती असफलताओं ने ही उन्हें भविष्य में सही फैसले लेने का रास्ता दिखाया. आमिर ने बताया कि ‘कयामत से कयामत तक’ की बंपर सफलता के बावजूद इंडस्ट्री के बड़े और स्थापित डायरेक्टर्स उन्हें सीरियसली नहीं ले रहे थे.

आमिर खान को नहीं मिल रहा था अपनी पसंद का काम

आमिर खान ने कहा, ‘उस दौर में किसी नए एक्टर को बड़े डायरेक्टर्स का भरोसा जीतने के लिए सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म काफी नहीं होती थी. हालांकि, मैं स्टार बन चुका था, लेकिन जिन बेहतरीन निर्देशकों के साथ मैं काम करना चाहता था, उनमें से किसी ने मुझे अप्रोच नहीं किया. मेरे पास कामयाबी तो थी, पर वैसा काम नहीं था जैसा मैं करना चाहता था.’

आमिर खान ने एक साथ साइन कर थी 10 फिल्में

उन्होंने बताया, ‘उस वक्त हिंदी सिनेमा में एक्टर्स एक साथ 40 से 50 फिल्में कर रहे थे. अनिल कपूर सबसे कम यानी करीब 33 फिल्में कर रहे थे, जबकि गोविंदा तो 70 का आंकड़ा पार कर चुके थे. मुझे लगा कि अगर मैं 10 फिल्में साइन कर लूं तो काफी होगा. मैंने नए डायरेक्टर्स की स्क्रिप्ट्स पर भरोसा करके 8 से 10 फिल्में साइन कर लीं. लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि मैं किस मुसीबत में फंसने जा रहा हूं. मेरे जैसे मिजाज के इंसान के लिए एक साथ 10 फिल्में करना बहुत ज्यादा था.’

एक के बाद एक फ्लॉप होने लगीं आमिर खान की फिल्में

आमिर खान को जल्द ही एहसास हो गया कि उन्होंने गलत फैसले ले लिए हैं. उन्होंने बताया कि अगर निर्देशक और आपकी सोच मेल नहीं खाती, तो नतीजा कभी अच्छा नहीं होता. आमिर बोलते हैं, ‘मैंने जो गलतियां की थीं, उन्हें सुधरने का कोई मौका नहीं था क्योंकि मैं कमिटमेंट कर चुका था. मैं दिन में तीन-तीन शिफ्ट में काम करता था. जब वे फिल्में रिलीज होने लगीं, तो एक के बाद एक लगातार फ्लॉप हुईं. मुझे लगता था कि मैं किसी दलदल में फंसता जा रहा हूं. मैं काम से लौटकर घर पर रोता था, क्योंकि जो काम मैं कर रहा था, उससे बिल्कुल खुश नहीं था.’

आमिर खान ने अपने लिए बनाया खास नियम

इसी दौर से सबक लेते हुए आमिर खान ने अपने जीवन में एक नियम बनाया कि फिल्म तभी करेंगे जब स्क्रिप्ट बेहतरीन होगी, डायरेक्टर पर पूरा भरोसा होगा और प्रोड्यूसर क्रिएटिव टीम का पूरा साथ देगा. जब आमिर अपने करियर के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब मशहूर निर्देशक महेश भट्ट ने उन्हें एक फिल्म ऑफर की.

‘दिल’ की कामयाबी में वापस दिलाया स्टारडम

आमिर जानते थे कि अगर वह इस फिल्म को साइन कर लेते हैं, तो इंडस्ट्री में उनका खोया हुआ स्टारडम तुरंत वापस मिल जाएगा. लेकिन उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई और उन्होंने मना कर दिया. आमिर का यह रिस्क आखिरकार रंग लाया. साल 1990 में माधुरी दीक्षित के साथ आई फिल्म ‘दिल’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिसने न सिर्फ आमिर खान के ढहते करियर को संभाला, बल्कि उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और भरोसेमंद सुपरस्टार्स में से एक बना दिया.

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