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होमताजा खबरदेश नदी में बहे पिता को देख नहीं घबराया 9 साल का नंदन, एक चालाकी ने बचा ली जान

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Karnataka News: कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में 9 साल के नंदन ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से पिता की जान बचाकर सभी का दिल जीत लिया. शरावती नदी में मछली पकड़ने के दौरान उसके पिता चंद्रू तेज बहाव में बह गए थे. नंदन ने घबराने के बजाय नदी किनारे दौड़ते हुए ग्रामीणों को मदद के लिए बुलाया और पानी में तैरती जैकेट देखकर बचाव दल को सही दिशा दिखाई. इसी वजह से उसके पिता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. अब प्रशासन नंदन के नाम की सिफारिश बहादुरी पुरस्कार के लिए करने जा रहा है.

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 नदी में बहे पिता को देख नहीं घबराया 9 साल का नंदन, एक चालाकी ने बचा ली जानZoom

शिवमोग्गा के 9 साल के नंदन ने शरावती नदी में बह रहे अपने पिता की सूझबूझ से जान बचाई. (फोटो FB)

Karnataka News: अक्सर कहा जाता है कि मुश्किल वक्त में इंसान की असली समझ सामने आती है. लेकिन कर्नाटक के एक 9 साल के बच्चे ने जो कर दिखाया, उसने इस कहावत को सच साबित कर दिया. सोचिए, आपके सामने पिता तेज बहाव वाली नदी में बह जाएं. ज्यादातर बच्चे डर जाते, रोने लगते या मदद के लिए वहीं खड़े रह जाते. लेकिन चौथी कक्षा में पढ़ने वाले नंदन ने ऐसा कुछ नहीं किया. उसने घबराने के बजाय दिमाग से काम लिया. पहले पिता के साथ-साथ नदी किनारे दौड़ा, फिर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया और आखिर में पानी में तैरती एक जैकेट देखकर ऐसा सुराग दिया, जिसने उसके पिता की जान बचा ली. आज हर कोई इस छोटे से बच्चे की सूझबूझ और हिम्मत को सलाम कर रहा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार नंदन की कहानी सिर्फ एक रेस्क्यू की नहीं है, बल्कि यह बताती है कि संकट की घड़ी में शांत दिमाग कितना बड़ा हथियार होता है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाला यह बच्चा किसी विशेष प्रशिक्षण से नहीं गुजरा था, लेकिन हालात को समझने और तुरंत सही फैसला लेने की उसकी क्षमता ने एक बड़ा हादसा टाल दिया. स्थानीय प्रशासन भी उसकी बहादुरी से इतना प्रभावित हुआ कि अब उसके नाम की सिफारिश बहादुरी पुरस्कार के लिए करने की तैयारी कर रहा है. यह घटना उन तमाम बच्चों के लिए भी प्रेरणा है, जो मुश्किल समय में हिम्मत और समझदारी से बड़ा बदलाव ला सकते हैं.

दो किलोमीटर तक बहते पिता की जान बचाने में बेटे की समझदारी बनी सबसे बड़ी ताकत

  • यह घटना कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के वरागोडु गांव की है. यहां रहने वाले 9 वर्षीय नंदन अपने पिता चंद्रू के साथ शरावती नदी में मछली पकड़ने गया था. इसी दौरान अचानक चंद्रू को दौरा पड़ा. उनका संतुलन बिगड़ा और वे नदी के तेज बहाव में बह गए. कुछ ही पलों में वे पानी के साथ करीब दो किलोमीटर दूर निकल गए.
  • नंदन ने उस वक्त जो किया, वही उसकी सबसे बड़ी बहादुरी साबित हुई. उसने रोने या घबराने के बजाय नदी किनारे दौड़ते हुए पिता का पीछा किया. इसके बाद वह आसपास के घरों में पहुंचा और ग्रामीणों से मदद की गुहार लगाई. उसकी बात सुनते ही स्थानीय लोग तुरंत नदी किनारे पहुंचे और बचाव अभियान शुरू कर दिया.
  • बचाव के दौरान नंदन की नजर पानी में तैर रही एक जैकेट पर पड़ी. उसने तुरंत ग्रामीणों से कहा कि उसके पिता उसी जगह के आसपास हो सकते हैं. बच्चे की इस बात को गंभीरता से लिया गया. ग्रामीणों ने उसी स्थान पर तलाश शुरू की और कुछ ही देर में चंद्रू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. नदी से बाहर लाने के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया, जिससे उनकी जान बच गई.

तैरती जैकेट बनी सबसे बड़ा सुराग

ग्रामीणों के लिए नदी के तेज बहाव में किसी व्यक्ति को तलाशना आसान नहीं था. ऐसे समय में नंदन ने पानी में तैरती अपने पिता की जैकेट देखी और तुरंत बचाव दल को उस दिशा में जाने के लिए कहा. यही छोटी-सी लेकिन अहम जानकारी रेस्क्यू ऑपरेशन का टर्निंग प्वाइंट बन गई. यदि यह सुराग नहीं मिलता तो चंद्रू को ढूंढ़ना काफी मुश्किल हो सकता था.

प्रशासन ने बहादुरी पुरस्कार के लिए की सिफारिश

नंदन चौथी कक्षा का छात्र है और गोरागोडु गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता है. उसके माता-पिता चंद्रू और गायत्री दिहाड़ी मजदूर हैं और खेतों में काम करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं. घटना के बाद नंदन अपने परिवार के साथ होसानगर के तहसीलदार भरत राज से मिला. तहसीलदार ने उसकी सूझबूझ और साहस की जमकर सराहना की. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि नंदन के नाम की सिफारिश राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार के लिए की जाएगी.

हर तरफ हो रही है नंदन की तारीफ

इस घटना के बाद पूरे इलाके में नंदन की चर्चा हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि वह घबरा जाता तो शायद उसके पिता की जान नहीं बच पाती. उसकी समझदारी, हिम्मत और सही समय पर लिया गया फैसला आज हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है. यह घटना बताती है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसला और सूझबूझ किसी भी बड़े इंसान से कम नहीं होती.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…

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