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भारत में हर 15 से 20 वर्षों के अंतराल पर ऐसे बड़े जन-आंदोलन उभरे हैं, जिन्होंने देश की शांति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। एक ध्यान देने योग्य पैटर्न यह भी रहा है कि जब-जब सीमाओं पर चीन या पाकिस्तान के साथ तनाव चरम पर पहुँचा, तब-तब देश के भीतर बड़े आंदोलनों के ज़रिए सत्ता परिवर्तन की स्थितियाँ बनीं। इस राजनीतिक पैटर्न के पीछे ग्रह-नक्षत्रों और गोचरों का भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। तो चलिए जानते हैं- क्या ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भारत में फिर किसी बड़े और हिंसक आंदोलन की आहट हो रही है?

 

(भारत के जन आंदोलन)

1. जेपी आंदोलन:

5 जून 1974 में स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) का आंदोलन हुआ और तब आपातकाल लगा। इसके बाद 1977 में सत्ता परिवर्तन हुआ।

ग्रह गोचर: लग्न में वृषभ राशि में सूर्य केतु की युति, सप्तम भाव में वृश्चिक राशि में राहु चंद्र की युति यानी चंद्र ग्रहण योग, मिथुन राशि दूसरे भाव में शनि और बुद्ध की युति, कर्क राशि में मंगल और कुंभ राशि में गुरु का षडाष्टक योग और मेष राशि में 12वें भाव का शुक्र था। मंगल का गुरु के साथ षडाष्टक योग और चंद्र ग्रहण ने शांति को भंग किया।

2. आरक्षण विरोधी आंदोलन:

जेपी आंदोलन के 16 साल बाद अगस्त 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह द्वारा मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने (अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC को सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण देने) की घोषणा के बाद देशव्यापी आंदोलन छिड़ गया। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। 

ग्रह गोचर: लग्न में कर्क राशि में सूर्य केतु की गुरु के साथ युति, सप्तम भाव में वृश्चिक राशि में राहु चंद्र की युति यानी चंद्र ग्रहण योग, मेष राशि में दसवें भाव में मंगल, छठे भाव में धनु राशि के शनि के साथ मंगल का षडाष्टक योग। दूसरे भाव में सिंह राशि का बुध और 12वें भाव में मिथुन राशि का शुक्र। इसका अर्थ है कि शनि का मंगल के साथ षडाष्टक योग बन रहा था। मंगल और शनि ने मिलकर शांति को भंग किया। 

 

3. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन:

आरक्षण आंदोलन के 21 साल बाद चर्चित भ्रष्टाचार विरोधी जन लोकपाल आंदोलन (अन्ना आंदोलन) मुख्य रूप से वर्ष 2011 में हुआ था। नई दिल्ली के जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में अप्रैल से अगस्त 2011 के दौरान अन्ना हजारे ने मजबूत लोकपाल कानून की मांग को लेकर ऐतिहासिक आमरण अनशन किया था। इसके बाद 2014 में सत्ता परिवर्तन हुआ। जून और जुलाई में आंदोलन अपने चरम पर था।  

ग्रह गोचर: कर्क राशि में सूर्य लग्न में शुक्र के साथ, 12वें भाव में मंगल मिथुन राशि में, केतु वृषभ राशि में 11वें भाव में, गुरु मेष राशि में होगर तीसरे भाव में कन्या राशि के शनि के साथ षडाष्टक योग बना रहा था, बुध सिंह राशि में होकर दूसरे भाव में था, चंद्र कुंभ राशि में अष्टम भाव में और राहु पंचम भाव में वृश्‍चिक का होकर विराजमान था। इसका अर्थ कि शनि का गुरु से और मंगल का राहु से योग बन रहा था। मंगल और शनि ने मिलकर शांति को भंग किया। 

4. नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन:

अन्ना हजारे के अंदोलन के 15 साल बाद जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी के झंडे तले छात्र आंदोलन चल रहा है। जिसमें विपक्ष के कई नेता शामिल हैं। इस आंदोलन में नीट परीक्षा में पेपर लीक का मामले के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा जा रहा है।

ग्रह गोचर: लग्नस्थ कर्क राशि में सूर्य और गुरु की युति, शुक्र और केतु सिंह राशि के दूसरे भाव में, चंद्र कन्या राशि का होकर तीसरे भाव में, राहु कुंभ राशि का होकर अष्टम भाव में, शनि मीन राशि का होकर भाग्य भाव में मंगल वृषभ राशि का होकर आय भाव में, बुध मिथुन राशि का होकर 12वें भाव में स्थिति है। कुंडली में मीन राशि के शनि की दृष्टी चंद्र पर होकर शांति भंग कर रही है। शनि की मंगल और सूर्य एवं गुरु पर भी दृष्‍टि है। राहु का गुरु और सूर्य के साथ षठाष्टक योग बन रहा है। शनि का शुक्र और केतु के साथ षडाष्टक योग बन रहा है। राहु का चंद्र के साथ षडाष्टक योग बन रहा है। 

 

(उपरोक्त आंदोलनों के कॉमन ग्रह नक्षत्र गोचर) 

1. मुख्य अशुभ योग (षडाष्टक योग)

चारों आंदोलनों में सबसे बड़ा कॉमन फैक्टर षडाष्टक योग (ग्रहों का एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में होना) रहा है, जो टकराव और अस्थिरता लाता है:

जेपी आंदोलन (1974): मंगल और गुरु का षडाष्टक योग।

आरक्षण आंदोलन (1990): शनि और मंगल का षडाष्टक योग।

अन्ना आंदोलन (2011): शनि और गुरु का षडाष्टक योग।

छात्र आंदोलन (2026): एक साथ कई षडाष्टक योग (राहु-गुरु/सूर्य, शनि-शुक्र/केतु, राहु-चंद्र)।

2. शांति भंग करने वाले मुख्य ग्रह

सभी आंदोलनों में जन-शांति और व्यवस्था बिगाड़ने में शनि, मंगल और राहु की भूमिका प्रमुख रही:

जेपी आंदोलन (1974): चंद्र ग्रहण योग और मंगल-गुरु के षडाष्टक योग ने शांति भंग की।

आरक्षण आंदोलन (1990): शनि और मंगल के आपस में बने षडाष्टक योग ने उग्रता बढ़ाई।

अन्ना आंदोलन (2011): शनि और मंगल के संयुक्त प्रभाव ने जन-आंदोलन को मजबूत किया।

छात्र आंदोलन (2026): शनि की दृष्टि और राहु के षडाष्टक योग ने माहौल को तनावपूर्ण बनाया।

 

3. चंद्रमा की स्थिति (जनता का असंतोष)

ज्योतिष में चंद्रमा जनता के मन का प्रतीक है। चारों आंदोलनों के समय चंद्रमा बुरी तरह पीड़ित रहा:

जेपी आंदोलन (1974): चंद्रमा वृश्चिक राशि में राहु के साथ पीड़ित (चंद्र ग्रहण योग)।

आरक्षण आंदोलन (1990): यहाँ भी चंद्रमा वृश्चिक राशि में राहु के साथ पीड़ित (चंद्र ग्रहण योग)।

अन्ना आंदोलन (2011): चंद्रमा अष्टम (खराब) भाव में होकर राहु-मंगल से प्रभावित रहा।

छात्र आंदोलन (2026): चंद्रमा पर शनि की सीधी दृष्टि और राहु का षडाष्टक योग रहा।

 

4. आंदोलन का अंतिम परिणाम

जेपी आंदोलन (1974): देश में आपातकाल लगा और बाद में सत्ता परिवर्तन हुआ।

आरक्षण आंदोलन (1990): व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और आगे चलकर सत्ता परिवर्तन हुआ।

अन्ना आंदोलन (2011): देशव्यापी जन-समर्थन मिला और 2014 में सत्ता परिवर्तन हुआ।

छात्र आंदोलन (2026): बड़े पैमाने पर जन-असंतोष और सरकार विरोधी प्रदर्शन की स्थिति बन रही है।

 

(भविष्य में शनि करेगा भारत में बड़ा बदलाव?)

वैसे देखा जाएगा तो शनि के मकर, कुंभ और मीन राशि के गोचर काल में कोरोना वायरस, रशिया यूक्रेन युद्ध, इजराइल हमास युद्ध, इजराइल ईरान युद्ध, अमेरिका ईरान युद्ध, भारत और पाकिस्तान का युद्ध हम देख ही चुके हैं। इसी के साथ हमने बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका जैसे कई देशों में हिंसक आंदोलन से सत्ता परिवर्तन भी देखा है। इस बीच भारत में कई राज्यों में भी सत्ता परिवर्तन हुआ और केंद्र में फिर से मोदी सरकार का गठन हुआ।

 

अब आशंका जताई जा रही है कि शनि ग्रह जब 27 जुलाई 2026 से अपनी वक्री चाल चलेंगे तब भारत में हिंसा का एक दौर प्रारंभ होका जिसे सरकार सख्‍ती से दबाएगी। इसके बाद 3 जून 2027 को शनि जब मेष राशि में प्रवेश करेगा तब देश और दुनिया में युद्ध, भूकंप और जनविद्रोह का एक नया दौरा प्रारंभ होगा जो पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा भयानक हो सकता है। इसलिए भारत के लोगों को संयम रखने की जरूरत है अन्यथा भारत का वही हाल होगा जो बांग्लादेश और पाकिस्तान का है।

 

जब-जब शनि मेष में रहा है, दुनिया में बड़े सत्ता परिवर्तन, युद्ध या सामाजिक क्रांतियां देखी गई हैं। मेष राशि में शनि अपनी शक्ति खो देता है, जिसे ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता। इस दौरान सरकार और जनता में अनुशासन और धैर्य की भारी कमी देखी जाती है। अभी शनि अपनी स्वराशि मीन में गोचर कर रहा है। मीन में शनि होने के कारण लोग अपनी बुद्धि खो देते हैं। इसके बाद यह 2027 में मेष में प्रवेश करेगा तब यह समय भारत के लिए कठिन परीक्षा का समय होगा।

 

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