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Paddy Farming Tips : मानसून आते ही धान की फसल पर ‘पत्ता लपेटक’ कीट का खतरा मंडराने लगा है. रोपाई के शुरुआती दिनों में लगने वाला यह कीट पत्तियों को सुखाकर पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है. यह कीट तेजी से फैलकर धान की हरी पत्तियों को आपस में लपेट देता है, जिससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि इस कीट पर नियंत्रण के लिए किसानों को अंधाधुंध रासायनिक दवाओं के बजाय सही मात्रा और सही विकल्प का चुनाव करना चाहिए. अगर कीट का हमला उग्र हो चुका है, तो 60 मिलीलीटर कोरोजन को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें.

शाहजहांपुर. मानसूनी सीजन के आते ही धान किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं. रोपाई के महज 10 से 15 दिन बाद ही कई क्षेत्रों में फसल पर ‘पत्ता लपेटक’ यानी लीफ फोल्डर कीट का प्रकोप देखा जा रहा है. यह कीट तेजी से फैलकर धान की हरी पत्तियों को आपस में लपेट देता है, जिससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है और सीधे उत्पादन पर असर पड़ता है. ऐसे में किसान शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं, ताकि शुरुआती अवस्था में ही इस नुकसानदेह कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके. शाहजहांपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि रोपाई के शुरुआती दो हफ्तों में धान की फसल बेहद संवेदनशील होती है. इस समय पत्ता लपेटक कीट का हमला पौधे की बढ़वार को पूरी तरह रोक सकता है.

डॉ. हादी के मुताबिक, इस पर नियंत्रण के लिए किसानों को अंधाधुंध रासायनिक दवाओं के बजाय सही मात्रा और सही विकल्प का चुनाव करना चाहिए. अगर प्रकोप कम है, तो प्रति एकड़ 8 किलोग्राम कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 4% जी.आर. का उपयोग मिट्टी में मिलाकर करें. अगर कीट का हमला उग्र हो चुका है, तो 60 मिलीलीटर कोरोजन (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एस.सी.) को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. यह दोनों ही विकल्प कीट के तंत्रिका तंत्र पर सीधा असर कर फसल को तुरंत सुरक्षा प्रदान करते हैं.

सफेद रंग की लंबी धारियां

पत्ता लपेटक कीट का शुरुआती हमला पहचानना बेहद आसान है. इस कीट की सूंडी (इल्ली) धान की मुलायम पत्तियों को किनारों से अंदर की तरफ मोड़कर एक नली या बेलनाकार ढांचा बना लेती है. इसके बाद वह पत्ती के अंदर सुरक्षित बैठकर उसके हरे हिस्से यानी क्लोरोफिल को खुरच-खुरच कर खाती है. इसके कारण पत्तियों पर सफेद रंग की लंबी धारियां दिखाई देने लगती हैं. उग्र अवस्था में पूरी पत्ती सूखकर सफेद हो जाती है और दूर से देखने पर पूरा खेत झुलसा हुआ या सफेद नजर आता है.

कीट के फैलने के कारण

मानसून के दौरान वातावरण में नमी और 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान इस कीट के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है. आसमान में बादल छाए रहना और लगातार रिमझिम बारिश इसके प्रसार को गति देती है. इसके अलावा, जो किसान खेत में आवश्यकता से अधिक नाइट्रोजन का इस्तेमाल करते हैं, उनकी फसल अधिक हरी और मुलायम हो जाती है, जो इस कीट को तेजी से आकर्षित करती है. कीट की तितलियां पत्तों पर अंडे देती हैं, जिससे सूंडियां निकलकर तेजी से फैलती हैं.

कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड का प्रयोग

रोपाई के 10 से 15 दिनों के भीतर यदि शुरुआती लक्षण दिखें, तो दानेदार कीटनाशक का प्रयोग बेहद असरदार साबित होता है. इसके लिए प्रति एकड़ 8 किलोग्राम कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 4% जी.आर. का इस्तेमाल करें. इसे सूखी रेत या हल्की खाद में मिलाकर पूरे खेत में एकसमान रूप से बिखेर दें. प्रयोग के समय खेत में 2-3 इंच पानी भरा होना चाहिए और यह पानी कम से कम 4-5 दिनों तक रुकना चाहिए, ताकि दवा जड़ के माध्यम से पूरे पौधे में फैल सके.

अचूक छिड़काव

अगर खेत में पत्तियां मुड़ने की समस्या ज्यादा बढ़ गई हो और सूंडियां सक्रिय रूप से नुकसान पहुंचा रही हों, तो छिड़काव प्रणाली अपनाएं. इसके लिए 60 मिलीलीटर कोरोजन (Coragen) कीटनाशक को प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह घोल लें. इस घोल का छिड़काव दोपहर बाद, धूप कम होने पर, नैपसैक स्प्रेयर की मदद से सीधे पौधों पर करें. कोरोजन का सिस्टेमिक असर कीटों को तुरंत लकवाग्रस्त कर देता है और फसल को लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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