पार्वती जयंती का महत्व
पार्वती जयंती मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को
आषाढ़ शुक्ल अष्टमी तिथि का प्रारम्भ- 21 जुलाई, 2026 को 04:02 ए एम से,
अष्टमी तिथि का समापन- 22 जुलाई 2026 को 05:16 ए एम पर।
पार्वती जयंती पर पूजा विधि
आषाढ़ शुक्ल अष्टमी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ, यदि संभव हो तो लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
पूजा स्थल को साफ कर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
माता पार्वती और शिवजी की प्रतिमा को गंगाजल व दूध से स्नान कराएं या जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर, लाल पुष्प, रोली, चंदन, अक्षत और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
शिव-पार्वती के मंत्रों का जप करें।
पार्वती जयंती की कथा का श्रवण या पाठ करें।
माता को फल, मिष्ठान या खीर का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें।
अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।
पार्वती जयंती का पर्व शक्ति और शिव के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख बना रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-शांति आती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पार्वती जयंती की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण योगाग्नि द्वारा अपने शरीर का त्याग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हिमालयराज हिमवान और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।
माता पार्वती बाल्यकाल से ही भगवान शिव को अपना पति मानती थीं। महर्षि नारद ने उन्हें बताया कि शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करनी होगी। नारद जी के मार्गदर्शन पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने जल, अन्न और यहां तक कि पत्ते यानी पर्ण खाना भी छोड़ दिया, जिसके कारण उन्हें ‘अपर्णा’ भी कहा गया।
उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके बाद शिव और पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। यही कारण है कि पार्वती जयंती को अटूट दांपत्य प्रेम और सौभाग्य का पर्व माना जाता है।
पार्वती जयंती केवल देवी पार्वती के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, तपस्या, समर्पण और अटूट विश्वास का संदेश भी देता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से माता पार्वती तथा भगवान शिव की आराधना करने से दांपत्य जीवन में सुख, परिवार में समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है। इसलिए इस पावन अवसर पर पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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