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Ballia Ground Report: बलिया में घाघरा नदी का कहर जारी है. लगातार नदी का जलस्तर आबादी वाले छेत्र की तरफ बढ़ता जा रहा है. जिससे आसपास रहने वाले लोग अब मजबूरी में अपने घर को छोड़कर दूर जा रहे हैं. गोपाल नगर ताड़ी के रहने वाले राजेश कुमार यादव ने बताया कि अब तक घाघरा नदी में लगभग 7 घर समा चुके हैं. देखते ही देखते मेरा पूरा सुंदर मकान गंगा में समा गया. अब जो भी ईंटें या दूसरा सामान बचा है लोग उसे बटोर कर ले जा रहे है. कटाव के करीब वाले घरों को लोग खुद अपने हाथों से तोड़ रहे है. जरा सोचिए खून-पसीने से बनाए गए घर को खुद अपने हाथों से तोड़ने का दर्द कितना भयानक होगा.

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का द्वाबा क्षेत्र एक तरफ गंगा और दूसरी तरफ घाघरा नदी से घिरा है. हर साल इन नदियों की वजह से यहां बाढ़ आती है. आज हम आपको एक ऐसे गांव की कहानी बता रहे हैं.. जिसका अस्तित्व अब खतरे में है. सालों से हो रहे कटाव को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. जिसका नतीजा यह है कि 6 किलोमीटर दूर बहने वाली घाघरा नदी अब इस गांव को निगलने को तैयार है. इस स्थिति के लिए कहीं न कहीं अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. अब तक 7 घर नदी में समा चुके हैं.

कटाव लगातार जारी है. जिससे लोगों में दहशत का माहौल है. हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई है. मजबूरन लोग अपने हाथों से अपने ही घरों को तोड़ रहे हैं और नए आशियाने की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं. सबसे दुखद बात यह है कि इस मुश्किल घड़ी में न तो कोई समाजसेवी और न ही कोई जनप्रतिनिधि इन पीड़ितों की सुध लेने आया है.

देखते ही देखते मकान गंगा में समा गया
गोपाल नगर ताड़ी के रहने वाले राजेश कुमार यादव ने बताया कि अब तक घाघरा नदी में लगभग 7 घर समा चुके हैं. देखते ही देखते मेरा पूरा सुंदर मकान गंगा में समा गया. अब जो भी ईंटें या दूसरा सामान बचा है लोग उसे बटोर कर ले जा रहे है. कटाव के करीब वाले घरों को लोग खुद अपने हाथों से तोड़ रहे है. जरा सोचिए खून-पसीने से बनाए गए घर को खुद अपने हाथों से तोड़ने का दर्द कितना भयानक होगा.

अधिकारी सिर्फ तमाशा देख रहे
अंकित कुमार यादव ने बताया कि अभी तक किसी भी तरह की राहत सामग्री नहीं बांटी गई है. बड़े-बड़े अधिकारी यहां आते है. लेकिन सब सिर्फ मूकदर्शक बने रहते है. कटाव को रोकने के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की गई. खानापूर्ति के लिए जियो बैग लगाए गए थे. जो अब गंगा में समा चुके है. कटाव रोकने के नाम पर सालों से सिर्फ भ्रष्टाचार होता रहा है. आसपास से ही मिट्टी काटकर जियो बैग में भरकर लगाए गए थे. जो साफ तौर पर लापरवाही दिखाता है.

400 से ज्यादा आबादी खतरे में
संजय कुमार यादव ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि क्या कहें और किससे कहें? ऊपर से इंद्रदेव का प्रकोप और नीचे से घाघरा नदी का कहर… इतना कष्ट शायद ही किसी को होता होगा, जिस दर्द में इस गांव के लोग रह रहे है. घर लगातार घाघरा नदी में समा रहे है. जहां से रिपोर्टिंग हो रही थी. वहां से लगभग 6 किलोमीटर दूर घाघरा नदी बहती थी. जो कटाव करते हुए अब यहां तक आ गई है. उन्होंने आगे कहा कि 400 से अधिक आबादी अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है. लगता है इस साल गोपाल नगर ताड़ी गांव का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा.

5 साल से हो रहा कटाव
संजय ने बताया कि अब तो सिर्फ 20 से 25 घर बचे होंगे. यह कटाव 5 साल से हो रहा है. लेकिन आज तक इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. अब लोग अपना घर अपने हाथों से तोड़कर यहां से जाने को मजबूर है. नए आशियाने के लिए लोग दर-दर भटक रहे है. अब तक यहां कोई समाजसेवी या जनप्रतिनिधि दिखाई नहीं दिया है. हर साल लूटपाट होती है. बबलू कुमार ने कहा कि यहां की स्थिति बहुत खराब है, क्योंकि कटाव से बहुत लोगों के घर डूब चुके है और अभी और डूबने वाले है.

अगर जिम्मेदार अच्छे से काम कराए होते तो शायद कटाव रुक गया होता. लेकिन यहां तो हर साल लूटपाट होती है. जियो बैग से कटाव रोकने का कोई मतलब ही नहीं है. एक बच्चा पूरी तरह से भावुक हो गया. उसने कहा कि अब थोड़ा सा खेत बचा है वहीं पर जाएंगे. अभी फिलहाल खुले आसमान के नीचे रह रहे है. गैस नहीं है, गोबर के उपले भीग गए है. अब तो दो वक्त की रोटी पर भी संकट आ गया है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

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