आइए जानते हैं मां छिन्नमस्ता का स्वरूप, उनकी गुप्त पूजा विधि और महत्व:
मां छिन्नमस्ता का दिव्य स्वरूप
उनका यह रूप यह संदेश देता है कि जीवन में अहंकार का त्याग कर आत्मज्ञान की ओर बढ़ना ही वास्तविक साधना है। मां छिन्नमस्ता दस महाविद्याओं में छठी महाविद्या हैं और त्याग, आत्मबल, वैराग्य, आत्मसंयम तथा आध्यात्मिक जागरण की प्रतीक मानी जाती हैं।
साधना का महत्व:
मां छिन्नमस्ता की साधना से व्यक्ति के जीवन में आ रही बड़ी से बड़ी रुकावटें, कर्ज की समस्या और अदालती विवाद तुरंत समाप्त हो जाते हैं। आध्यात्मिक साधकों के लिए यह साधना रीढ़ की हड्डी में स्थित ‘कुंडलिनी शक्ति’ को जाग्रत करने और विशेष रूप से ‘आज्ञा चक्र’ को सक्रिय करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
षष्ठी तिथि की विशेष पूजा विधि
मां छिन्नमस्ता की पूजा भी गुप्त नवरात्रि की अन्य देवियों की तरह आधी रात्रि में करना सर्वोत्तम माना जाता है। गृहस्थ साधक इसे सुबह के समय सात्विक भाव से कर सकते हैं:
1. स्नान करके नीले या गहरे रंग के वस्त्र धारण करें। यदि उपलब्ध न हो, तो लाल वस्त्र भी पहन सकते हैं। पूजा स्थान पर बैठकर आचमन करें और हाथ में जल लेकर मां छिन्नमस्ता की पूजा का संकल्प लें।
2. लकड़ी की चौकी पर काले या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। उस पर मां छिन्नमस्ता का चित्र या ‘छिन्नमस्ता यंत्र’ स्थापित करें। माता के सम्मुख सरसों के तेल या घी का दीपक और धूप जलाएं।
3. माता को कुमकुम, अक्षत और नीले या लाल रंग के फूल, जैसे- विशेष रूप से गुड़हल या अपराजिता के फूल अर्पित करें। इत्र और लौंग का जोड़ा अर्पित करना भी इस दिन शुभ माना जाता है।
4. रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार या एक माला माता के इस विशेष भयनाशक और शक्ति प्रदायक मंत्र- ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा॥’ का जाप करें।
5. मंत्र जाप के बाद माता की आरती करें। पूजा के अंत में हाथ जोड़कर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और जीवन के सारे कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें।
6. मां छिन्नमस्ता को भोग में उड़द की दाल की पिठ्ठी से बने पकवान, इमरती, या कोई भी लाल रंग की मिठाई अर्पित की जाती है तथा अनार या मौसमी फल भी चढ़ाएं जाते हैं।
मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर मां छिन्नमस्ता की विधिपूर्वक पूजा करने से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति दूर होती है। साथ ही साधक को आत्मविश्वास, साहस और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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