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होमताजा खबरकृषिखेत बचाओ अभियान, एक्सपर्ट ने बताए बड़े फायदे, कैसे बदलेगी खेती की तस्वीर?

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Gonda Save the Farm Campaign: डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है कि खेत बचाओ अभियान अपनाने से मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है. इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है. उत्पादन बढ़ता है और खेती की लागत कम होती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें और मिट्टी को बचाने के लिए संतुलित उर्वरकों व जैविक खाद का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें. स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर पैदावार और किसानों की अच्छी आय की मजबूत नींव है.

गोंडा: बदलता मौसम रासायनिक खादों का बढ़ता इस्तेमाल और मिट्टी की घटती उर्वरता ये सब किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गए है. ऐसे में ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आया है. इस अभियान का मुख्य मकसद खेत की मिट्टी को स्वस्थ रखना खेती की लागत कम करना और फसल का उत्पादन बढ़ाना है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान कुछ आसान उपाय अपनाएं तो लंबे समय तक अपने खेत की उर्वरता बनाए रख सकते है.

कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के अध्यक्ष और वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि किसानों को हर 2 से 3 साल में अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए. मिट्टी की जांच से पता चलता है कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है. इसी के आधार पर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे फसल को पूरा पोषण मिलता है. और अनावश्यक खर्च भी बचता है.

जैविक खाद का ज्यादा इस्तेमाल करें
डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि रासायनिक खादों के लगातार और अधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसलिए किसानों को गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कंपोस्ट, हरी खाद और अन्य जैविक खादों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए. इससे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है और उसकी उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है.

फसल चक्र अपनाना भी है जरूरी
चंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार, एक ही खेत में हर साल एक जैसी फसल लगाने से मिट्टी में कुछ पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. इसलिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए. इसके अलावा, फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में मिलाना चाहिए. इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और प्रदूषण भी कम होता है.

किसानों को होगा सीधा फायदा
डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है कि खेत बचाओ अभियान अपनाने से मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है. इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है. उत्पादन बढ़ता है और खेती की लागत कम होती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें और मिट्टी को बचाने के लिए संतुलित उर्वरकों व जैविक खाद का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें. स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर पैदावार और किसानों की अच्छी आय की मजबूत नींव है. चंद्रमणि त्रिपाठी बताते है कि खेत बचाओ अभियान के तहत दीनदयाल संस्थान से 8 ब्लॉक पर किसानों को इसके बारे में जानकारी दी गई है. साथ ही प्रतिदिन 2 ग्राम सभा में खेत बचाओ अभियान का कार्यक्रम भी किया गया है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

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