भगवान श्रीकृष्ण को लेकर यूपी के मौलाना जर्जिस अंसारी के आपत्तिजनक बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने भी नाराजगी जताई है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हैदराबाद में चल रही हनुमत कथा के दौरान अंसारी को ‘घर वापसी’ की सलाह देते हुए कहा कि दोबारा ऐसा बयान दिया तो उनके दरवाजे पर भगवद्गीता का पाठ करेंगे। शास्त्री ने कहा कि हर धर्म को अपनी आस्था तक सीमित रहना चाहिए। दूसरे धर्म की मान्यताओं पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमत कथा तेलंगाना के शमशाबाद में 17 जुलाई से शुरू हुई है, जो 19 जुलाई तक चलेगी। सबसे पहले पढ़िए जर्जिस का वो बयान जिस पर विवाद है यूपी में इटावा के रहने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी ने कहा था- भगवान श्रीकृष्ण धर्म से मुस्लिम थे और दिन में 5 बार नमाज पढ़ा करते थे। यकीन ना आए तो श्रीमद्भागवत गीता का छठा अध्याय का दसवां मंत्र देख लीजिए… योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः । एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥ मौलाना ने दावा किया- ‘श्लोक में कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन! ईश्वर की जब पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो। योगी, यूपी वाला नहीं। योगी युञ्जीत सततमात्मानं, पूरे शरीर का योग करो। यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए और पूरे शरीर का योग होना चाहिए। आज हिंदू धर्म में चले जाइए, सिर्फ ऐसे हाथ उठाएंगे, ‘ओम नमः शिवाय’, बस हो गई पूजा। ये हिंदू-मुस्लिम अगर ये अपनी किताबें पढ़ लें, योगी जी बड़े भक्त बनते हैं राम के… अगर हमारी किताबें पढ़ लें, तो यकीन मानिए इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। क्योंकि इस्लाम सिर्फ मुसलमानों का धर्म नहीं, ये उनका भी धर्म है। इसी दीन और इसी धर्म को रामचंद्र जी ने भी पेश किया है, कृष्ण जी ने भी पेश किया है। ये सिर्फ मुसलमानों का नहीं है। अब पढ़िए इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने मौलाना को क्या कहा? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मौलाना जर्जिस अंसारी बयान से से उन्हें दुख पहुंचा है। भारत में जन्म लेने वाले सभी लोगों की सांस्कृतिक जड़ें एक हैं। उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण देते हुए भी अपनी बात रखी और कहा कि अलग-अलग आस्था रखने के बावजूद लोगों की सांस्कृतिक विरासत एक है।
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