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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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समय रैना (दाएएं) और रणवीर अलाहाबादिया (बाएं) ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो में दिव्यांगों पर विवादित टिप्पणी की थी। – फाइल

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर, निशांत जगदीश तंवर पर 3 लाख रुपए जुर्माना लगाया है।

अदालत ने दिव्यांगों पर विवादित टिप्पणी के केस में यह आदेश दिया है। इसकी सुनवाई CJI सूर्यकांत, जॉयमाल्या बागची और वी मोहन की बेंच ने की। बेंच ने कहा कि हमारे आदेश के बावजूद रैना ने अपने शो पर किसी दिव्यांंग को नहीं बुलाया।

अदालत ने कहा-

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हमें लगता है कि रैना ने अदालत को गुमराह किया और हमारे आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया। हम उन पर जुर्माना लगाते हैं, जिसे 2 हफ्ते में जमा करना होगा।

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अदालत क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रैना के शो पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज के खर्च पर असंवेदनशील टिप्पणी करने और दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप है।

संस्था की ओर से वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए उनसे या किसी अन्य दिव्यांगजन से कभी संपर्क नहीं किया। इसके बाद अदालत ने जुर्माना लगाया।

दिव्यांग की गरिमा के उल्लंघन का आरोप, कोर्ट के निर्देश

  • याचिका में दिव्यांगों के जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट के प्रसारण पर नियम बनाने की मांग की गई है। याचिका नवंबर 2025 में दायर की गई।
  • 2025 में अदालत ने रैना और दूसरे स्टैंडअप कॉमेडियन्स को दिव्यांगों के इलाज के लिए फंड जुटाने के लिए हर महीने 2 शो करने का निर्देश दिया था।
  • यह भी कहा था कि शो में दिव्यांगों को भी शामिल होने के लिए राजी करें।

2025 में रणवीर के कमेंट से शुरू हुआ विवाद

फरवरी 2025 में रणवीर अलाहाबादिया समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट में बतौर गेस्ट जज पहुंचे। उन्होंने एक प्रतियोगी से माता-पिता के यौन संबंधों से जुड़ा बेहद आपत्तिजनक सवाल पूछा। इस क्लिप के वायरल होने के बाद पूरे देश में भारी विरोध शुरू हो गया।

इसके बाद महाराष्ट्र और असम समेत कई राज्यों में FIR दर्ज हुई। शिकायतों में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य पैनलिस्टों के नाम शामिल किए गए। आरोप लगाए गए कि शो में अश्लील और अभद्र सामग्री परोसी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। सार्वजनिक मंच पर शालीनता और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। कुछ युवा खुद को “बहुत ओवरस्मार्ट” समझते हैं।

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