लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 63 किलोमीटर है. इसे फिलहाल छह लेन के रूप में तैयार किया गया है, जबकि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे आठ लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी की गई है. यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, यानी वाहन केवल निर्धारित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट से ही इस पर चढ़ और उतर सकेंगे. इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और वाहनों की रफ्तार भी बनी रहेगी.
कई स्थानों पर बनाए गए एंट्री और एग्जिट प्वाइंट
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर कुल पांच प्रमुख एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए गए हैं. इनमें लखनऊ का मीरनपुर पिनवट इंटरचेंज शामिल है, जहां से शहीद पथ, अमौसी एयरपोर्ट और राजधानी के अन्य हिस्सों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा. इसके अलावा उन्नाव इंटरचेंज शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए मुख्य प्रवेश और निकास बिंदु होगा. कंथा इंटरचेंज उन्नाव के मध्य क्षेत्र के लोगों को एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. अमरसास इंटरचेंज पश्चिमी उन्नाव और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा. वहीं कानपुर की ओर आजाद नगर इंटरचेंज बनाया गया है, जहां से जाजमऊ, कानपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा. वाहन केवल इन्हीं पांच निर्धारित इंटरचेंज के माध्यम से एक्सप्रेसवे पर प्रवेश और निकास कर सकेंगे.
4200 करोड़ रुपये की लागत से बना
करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम वर्ष 2022 में शुरू हुआ था. जमीन अधिग्रहण, बिजली लाइनों के स्थानांतरण और निर्माण कार्य के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन करीब साढ़े चार साल में यह परियोजना पूरी कर आम लोगों के लिए खोल दी गई. इसे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस है एक्सप्रेसवे
इस एक्सप्रेसवे पर आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है. यहां सीसीटीवी कैमरे, एआई आधारित निगरानी प्रणाली, पेट्रोलिंग वाहन, एंबुलेंस और इमरजेंसी सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसके अलावा फास्टैग आधारित टोल सिस्टम की व्यवस्था की गई है, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और सफर पहले से अधिक तेज और सुगम होगा.
उद्योग, व्यापार और रोजगार को मिलेगा नया बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे केवल कानपुर और लखनऊ के बीच की दूरी कम नहीं करेगा, बल्कि प्रदेश के विकास का नया कॉरिडोर भी बनेगा. इससे उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश के क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर उन्नाव और आसपास के इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. कानपुर और लखनऊ के बीच शुरू हुआ यह नया एक्सप्रेसवे अब सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास और प्रगति की नई पहचान बनकर उभरा है. आने वाले समय में इसका लाभ लाखों लोगों को मिलेगा और दोनों शहरों के बीच की दूरी अब कम समय में सिमट जाएगी.
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