इस अवसर पर सूर्य देव की उपासना, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और मंत्र-जप का विशेष महत्व बताया गया है। इससे न केवल मान-सम्मान और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है, बल्कि जीवन के सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए शुभ कार्यों से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस बार बृहस्पतिवार, 16 जुलाई 2026 को सूर्य कर्क संक्रांति पर्व मनाया जा रहा है।
यदि आप सूर्य कर्क संक्रांति के दिन ये 7 शुभ कार्य करते हैं, तो आपको सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होगी…
कर्क संक्रांति पर किए जाने वाले 7 शुभ कार्य
1. पवित्र नदी में स्नान या गंगाजल का छिड़काव
इस दिन किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे शारीरिक रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
2. सूर्य देव को ‘विशेष अर्घ्य’ देना
संक्रांति के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में साफ जल लें। उसमें लाल चंदन, लाल फूल/ गुड़हल, अक्षत/ चावल और थोड़े से काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।
3. पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान
4. तांबे और गेहूं का दान
शास्त्रों में संक्रांति के दिन दान का अनंत गुना फल बताया गया है। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन तांबे के बर्तन, गेहूं, लाल कपड़े, गुड़, लाल चंदन और घी का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अवश्य करें।
5. गायत्री मंत्र का जाप
मानसिक शांति, बुद्धि की प्रखरता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए इस दिन कम से कम 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। संक्रांति की शांत बेला में किया गया गायत्री मंत्र का जाप सीधे आत्मा को बल प्रदान करता है।
6. नमक रहित भोजन/ बिना नमक का व्रत
संक्रांति के दिन यदि संभव हो तो एक समय उपवास रखें या अपने भोजन में नमक का सेवन न करें। आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों के अनुसार, संक्रांति पर नमक का त्याग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी/ Immunity बढ़ती है और कुंडली में सूर्य मजबूत होता है।
7. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
जीवन में मान-सम्मान, नौकरी में उन्नति और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए संक्रांति के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना बेहद चमत्कारी माना जाता है। यदि आपके पास समय कम हो, तो आप सूर्य अष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।
सूर्य कर्क संक्रांति का पर्व श्रद्धा, सेवा और आत्मअनुशासन का संदेश देता है। इस दिन सूर्य देव की उपासना, स्नान, दान और मंत्र-जप जैसे शुभ कार्य करने से आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यताओं का भी सम्मान करना चाहिए।
विशेष बात: चूंकि कर्क संक्रांति से वर्षा ऋतु और ऋतु परिवर्तन का समय शुरू होता है, इसलिए इस दिन से अपनी जीवनशैली और खान-पान में सात्विकता लाना बेहद जरूरी माना गया है।
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