खीरी जिला अपने प्राचीन और धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां कई ऐसे मंदिर हैं जिनसे जुड़ी मान्यताएं और रहस्य आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं. जिले में लिलौटीनाथ मंदिर की स्थापना पाण्डवों ने की थी शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर कंडवा और जमुई नदियों के संगम पर लिलौटीनाथ शिव मंदिर स्थापित है. इस मंदिर की खास बात यह है कि आज भी यहां शिवलिंग की पूजा भक्तों के पहुंचने से पहले हो जाती है.
दिन में रंग बदलता है शिवलिंग
जुनई और कंडवा नदी के संगम पर बसे इस मंदिर की मान्यता खीरी जिले में ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी है. खास यह है कि शिवलिंग दिन मे कई बार रंग बदलता है. मान्यता है कि सुबह के समय काला, दोपहर में भूरा और रात के समय हल्की सफेदी शिवलिंग को विशेष बनाती है. लिलौटीनाथ शिव मंदिर में शिवलिंग में आकृति उभरी है. श्रद्धालु इसे माता पार्वती का स्वरूप मानते हैं. लिलौटी मंदिर प्रांगण में हर अमावस्या पर मेला लगता है. भंडारे और प्रसाद का वितरण होता है. स्थानीय और जिले के अन्य जगहों के दुकानदार खिलौने, मिठाई, लकड़ी घरेलू समान की दुकान आकर्षण होती है. चारों और जंगल की हरियाली और जूनई कंडवा के संगम किनारे लोग बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराते हैं.
महाभारत काल से है संबध्द
सावन में लाखों की संख्या में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए काफी दूर-दूर से शिव भक्त आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं. मान्यता है कि मानी गई हर मनोकामना यहां पूर्ण हो जाती है. लिलोटी नाथ शिव मंदिर महाभारत कालीन का बताया जाता है. बातचीत करते हुए महंत पंकज गिरी बताते हैं कि लिलौटीनाथ शिव मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, अपनी मनोकामना भी मांगते हैं मनोकामना पूर्ण हो जाती है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भगवान शिव और माता पार्वती एक में स्थापित है. अश्वत्थामा और आल्हा उदल इस मंदिर में प्रथम पूजा करते हैं. कपाट खुलने से पहले शिवलिंग पूजित मिलता है और रंग बदलता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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