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Astrology Bathing Tips: क्या आप भी बिना कपड़ों के स्नान करते हैं? नहाने से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें जानने के बाद आप शायद ही कभी ऐसा करें. यह सिर्फ स्वच्छता का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारण भी हैं. आइए जानते हैं कि नहाने के सही तरीके क्या हैं और क्यों हमें कुछ आदतों से बचना चाहिए…
Astrology Bathing Tips: धर्म शास्त्रों में स्नान को केवल शरीर की स्वच्छता का माध्यम नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का भी महत्वपूर्ण साधन माना गया है. धर्म शास्त्रों में स्नान को लेकर समय, विधि और नियमों का विशेष उल्लेख मिलता है. लेकिन आज के दौर में हर कार्य इतनी जल्दबाजी में किए जाते हैं, जिसकी वजह से नियम, विधि जैसी चीजों का ध्यान नहीं रहता. कम समय होने की वजह से कुछ लोग तो जल्दी-जल्दी नहा कर निकल जाते हैं, वहीं कुछ लोग आराम से बिना कपड़ों के नहाते हैं.
आमतौर पर 100 में से 95 लोग कपड़े उतार कर ही स्नान करना पसंद करते हैं. वह ऐसा मानते हैं कि कपड़े उतारकर स्नान करने से अच्छे से साबुन लग जाता है और सफाई भी हो जाती है. न्यूड यानी कपड़ों के बिना स्नान करना अशुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान के समय कम से कम एक स्वच्छ वस्त्र या अंगोछा धारण करना उचित माना गया है. शास्त्रों में इसे मर्यादा और शील से जोड़ा गया है. मान्यता है कि स्नान के दौरान देवता, पितृ और सूक्ष्म शक्तियों की उपस्थिति मानी जाती है, इसलिए बिना कपड़ों के स्नान करना उचित नहीं माना जाता. इसलिए घर के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि बिना कपड़ों के स्नान नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति के मन और घर पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
बिना कपड़ों के स्नान करने के पीछे एक पौराणिक कहानी भी है. आपने भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के कपड़े चुराने की कहानी तो सुनी ही होगी. यह लीला करने के पीछे भगवान कृष्ण समाज को संदेश देते हैं कि बिना कपड़ों के स्नान नहीं करने चाहिए. ऐसा करने से जल के देवता वरुण का अपमान होता है और वे नाराज हो सकते हैं. गरुड़ पुराण और पद्म पुराण में भी बताया गया है कि स्नान करते समय जल हमारे पितरों को प्राप्त होता है. अगर आप न्यूड यानी निर्वस्त्र होकर स्नान करते हैं तो उनकी आत्मा को कष्ट पहुंचता है और पितृ दोष लग सकता है.
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एक और दिलचस्प जानकारी ये सामने आती है कि पहले के जमाने में बड़े-बड़े बाथरूम नहीं हुआ करते थे, लोग छोटे-सी जगह पर ही नहाते थे. सुविधा ना होने, बाथरूम में सांप, कीड़ों के घुसने का खतरा रहता था, इसलिए उन्हें कम कपड़े पहनकर नहाने की सलाह दी जाती थी. अब, चूंकि घरों में बाथरूम होते हैं, इसलिए इस प्रथा का ज्यादातर लोग पालन नहीं करते और कपड़ों के बिना नहाते हैं.
बिना कपड़ों के स्नान करने से अचानक कोई इमरजेंसी सिचुएशन आ जाए तो तुरंत बाहर निकलना संभव नहीं हो पाता. खासकर, जब आप कहीं बाहर, किसी रिलेटिव, होटल, रिसॉर्ट्स आदि जगहों पर गए हों. ऐसी स्थिति से बचने के लिए कुछ ना कुछ छोटा सा कपड़ा, टॉवल आदि में ही नहाना सही रहता है. पहले से कपड़े पहनकर स्नान करना बेहतर है.
धर्म शास्त्रों के अनुसार स्नान हमेशा स्वच्छ स्थान पर करना चाहिए. स्नान से पहले ईश्वर का स्मरण करना, जल का सम्मान करना और स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है. अगर संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाने और स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देने की भी परंपरा है. इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय स्नान करना श्रेष्ठ माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस समय स्नान करने से तन और मन दोनों की शुद्धि होती है तथा दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. वहीं, पूजा, व्रत, यज्ञ या किसी शुभ कार्य से पहले स्नान करना भी आवश्यक माना गया है.
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